एक तू ही नहीं

एक तू ही नहीं

तुम्हारी याद सताती है, मेरे पास आओ .

थक कर चूर हो गया हु में, मुझे अपने आँचल में सुलाओ,

हाथो को अपने मेरे सर पर फिराओ ,

एक बार प्यार से वो लोरी सुनाओ ,

में क्या हु कैसे हु सब माँ की वजह से हुँ।

मन हुँ अपने पिता का.

इज्जत अपनी माँ की.

परछाई हुँ अपनी बहनो की.

फिसल जाऊ में इस राह से.

यह मुमकिन नहीं.

दिल में सब है बस एक तू ही नहीं।