मंदिर का मलबा, देवी-देवताओं की आकृति और भी बहुत कुछ.., अजय मिश्रा ने जमा की 'ज्ञानवापी सर्वे' की रिपोर्ट

नई दिल्ली: पूर्व एडवोकेट कमिश्नर अजय मिश्रा ने वाराणसी कोर्ट में विवादित ज्ञानवापी मस्जिद में किए गए सर्वे की रिपोर्ट पेश कर दी है. बताया जा रहा है कि सर्वे रिपोर्ट में अजय मिश्रा ने दावा करते हुए कहा है कि ज्ञानवापी परिसर में उत्तर से पश्चिम दीवार के कोने पर पुराने मंदिरों का मलबा पाया गया है, जिस पर देवी-देवताओं की कलाकृति बनी हुई थीं. इसके साथ ही उत्तर से पश्चिम की ओर चलते हुए बीच के सिलावट पर शेषनाग की कलाकृति और नागफनी जैसी आकृतियां भी नज़र आई हैं. 

अभी अजय मिश्रा ने 6 मई और 7 मई को किए गए सर्वे की रिपोर्ट अदालत में पेश की है. उस समय वे अकेले कोर्ट कमिश्नर थे. इस दौरान वीडियोग्राफी भी कराई गई थी. यह डेटा भी अदालत में पेश कर दिया गया. रिपोर्ट में उन्होंने बताया है कि, 6 मई को किए गए सर्वे के दौरान बैरिकेडिंग के बाहर उत्तर से पश्चिम दीवार के कोने पर पुराने मंदिरों का मलबा पाया यगा, जिस पर देवी-देवताओं की कलाकृति बनी हुई थी और अन्य शिलापट पट्ट थे, जिन पर कमल की कलाकृति थी.

रिपोर्ट के अनुसार, पत्थरों के अंदर की तरफ कुछ कलाकृतियां आकार में स्पष्ट रूप से कमल और अन्य आकृतियां बनी हुईं थीं. उत्तर पश्चिम के कोने पर गिट्टी सीमेन्ट से चबूतरे पर नए निर्माण को देखा जा सकता है. इन सभी शिलापट्ट और आकृतियों की वीडियोग्राफी कराई गई. शिलापट्ट पर देव विग्रह, जिसमें चार प्रतिमाओं की आकृति बनी है, जिस पर सिन्दूरी रंग लगा हुआ है, चौथी आकृति जो मूर्ति की तरह लग रही है, उस पर सिन्दूर का मोटा लेप लगा हुआ है. 

रिपोर्ट के अनुसार, सभी शिलापट्ट भूमि पर बहुत लंबे समय से पड़े लग रहे हैं. ये प्रथम दृष्टया किसी बड़े भवन के खंडित अंश दिखाई देते हैं. बैरिकेडिंग के भीतर मस्जिद की पश्चिम दीवार के बीच मलबे का ढेर पड़ा है. ये शिलापट्ट पत्थर भी उन्हीं का हिस्सा दिखाई दे रहे हैं. इन पर उभरी कुछ कलाकृतियां मस्जिद की पीछे की पश्चिम दीवार पर उभरी कलाकृतियों जैसी नज़र आ रही है. अजय मिश्रा ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि सर्वे के दौरान उन्होंने वादियों और उनके वकीलों से सवाल किया कि क्या विवादित स्थल के पश्चिमी दीवार की बैरिकेडिंग के बाहर सिन्दूर लगी 3-4 कलाकृति और चौखट प्रकार का शिलापट्ट श्रृंगार गौरी है या नहीं. इसके जवाब में बताया गया कि यह श्रृंगार गौरी मंदिर की चौखट का अवशेष है. उनकी कलाकृतियों के प्रतीक को ही अभी श्रृंगार गौरी मान कर पूजा जाता है. क्योंकि बैरिकेडिंग के भीतर जाना प्रतिबंधित है. 

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