आखिर वामपंथी छात्र क्यों लगाते हैं देश विरोधी नारे!

23 फरवरी को भी दिल्ली में छात्रों के बीच घमासान मचा रहा। इस घमासान के दौरान ही 22 फरवरी की घटना का जो वीडियो सामने आया है, उसमें वामपंथी छात्र संगठन आईसा के विद्यार्थी खुलेआम देश विरोधी नारे लगा रहे हैं। गत वर्ष जेएनयू में भी इस तरह की नारेबाजी हुई थी, तब जांच के दौरान सामने आई थी। दिल्ली में देश विरोधी माहौल के पीछे पाकिस्तान और कश्मीर के अलगाववादियों का हाथ है।

सवाल उठता है कि आखिर वामपंथी की विचार धाराओं से जुड़े छात्र देश विरोधी नारे क्यों लगाते हैं? माना तो यही जाता है कि स्कूल कॉलेज में पढऩे वाले विद्यार्थी राजनीति नहीं करते, लेकिन दो दिनों से दिल्ली में जो कुछ भी हो रहा है? वह राजनीति से आगे बढ़ कर है। ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ लोग अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर देश का माहौल खराब करना चाहते हैं।

किसी विचारधारा का छात्र संगठन सरकार की आलोचना तो कर सकता है, लेकिन यदि कश्मीर और बस्तर की आजादी की मांग करे, तो यह समझ से परे है। उमर खालिद जैसे छात्र नेता दिल्ली में टीवी चैनलों पर अभिव्यक्ति के नाम पर कुछ भी बयान दें, लेकिन 23 फरवरी को भी आतंकी हमले में कश्मीर घाटी में हमारे तीन जवान शहीद हो गए। लेफ्टीनेंट कर्नल और मेजर स्तर के दो अधिकारी जख्मी हुए।

जिस कश्मीर में देश की एकता और अखंडता को बनाएरखने के लिए हमारे जवान रोज शहीद हो रहे हैं, आईसा उस कश्मीर को कौन सी आजादी दिलाना चाहता हैं। आइसा से जुड़े छात्रों को यह बात भी ध्यान रखनी चाहिए कि पाकिसतान में विगत दिनों ही अली शाहबाज कलंदर की दरगाह में आतंकियों ने जो विस्फोट किया, उसमें सौ मुसलमान मारे गए। उमर खालिद और उसके समर्थक यह बता सकते हैं कि आखिर पाकिस्तान की दरगाह में मुसलमानों को मौत के घाट क्यों उतारा गया।

भारत में ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती, निजामुद्दीन औलिया जैसे सूफी संतों के संदेशों की वजह से ही अभी तक हिन्दू और मुसलमानों में भाईचारा बना हुआ है। सूफी संतों की वजह से मुसलमानों के साथ हिन्दू रह रहा है, जबकि कश्मीर में जो विचारधारा पनपी, उसमें हिन्दुओं को पीट-पीट कर भगा दिया। आज सम्पूर्ण घाटी हिन्दू विहीन हो गई है। 

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