इस्लाम को अपने संविधान से हटाएगा ये मुस्लिम देश

नई दिल्ली: अफ्रीकी देश ट्यूनीशिया में तख्तापलट होने के एक साल बाद देश के राष्ट्रपति कैस सैईद एक ऐसे संवैधानिक मसौदे को स्वीकृति देने जा रहे हैं, जिसके बाद इस्लाम को राज्यधर्म की मान्यता समाप्त हो जाएगी। रिपोर्ट्स के अनुसार, संविधान के ड्राफ्ट को शनिवार (25 जून 2022) को जनमत संग्रह के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, देश के राष्ट्रपति ने हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि, 'ट्यूनीशिया के अगले संविधान में इस्लाम राज्य के आधिकारिक धर्म के रूप में नहीं रहेगा, बल्कि ये एक उम्माह (समुदाय) के रूप में होगा।'

उल्लेखनीय है कि उत्तरी अफ्रीकी देश ट्यूनीशिया मुस्लिम बहुल जनसंख्या वाला देश है और अब तक यहाँ के संविधान ने इस्लाम को राज्य धर्म के तौर पर अपनाया था। मगर, अब देश के राष्ट्रपति कैस सईद इस्लाम को राज्य के धर्म से बाहर करना चाहते हैं। ट्यूनीशिया ऐसा देश है, जहाँ बहुसंख्यक मुस्लिम जनसंख्या होने के बाद भी वहाँ इस्लामी कानून शरिया का पालन नहीं किया जाता है। इसका कानूनी स्ट्रक्चर ज्यादातर यूरोपीय सिविल लॉ पर आधारित है।

दरअसल, कैस सईद ने गत वर्ष ही ट्यूनीशिया की संसद को भंग कर दिया था और जुलाई 2021 में देश की सत्ता पर पूरी तरह से अधिकार कर लिया था। इस्लामिक मुल्क के कई राजनेता सईद के इस्लाम को राज्य से अलग करने के प्रयासों का विरोध करने लगे हैं। ट्यूनीशिया की इस्लामिक पार्टी एन्हाडा के नेता रचेड घनौनी ने कहा है कि, 'सियासत में सबसे बड़ा भ्रष्टाचार, अत्याचार है और इसका उपचार लोकतंत्र की तरफ लौटना और शक्तियों को अलग करना है।'

संवैधानिक मसौदा समिति कि अध्यक्षता कर रहे ट्यूनिस लॉ स्कूल के पूर्व डीन सदोक बेलैड ने कहा था कि देश के नए संविधान में इस्लाम का कोई संदर्भ नहीं होगा। उन्होंने कहा कि ट्यूनीशिया के 80 फीसद से ज्यादा लोग इस्लामिक पॉलिटिक्स के विरोधी हैं और कट्टरपंथ के विरुद्ध हैं।

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