वास्तु के अनुसार जान लें गर्भवती स्त्री क्या करे और क्या न करे?

विवाह के बाद सभी स्त्रियों में माँ बनने की चाहत होती है. किन्तु जब कोई स्त्री गर्भ धारण करती है तो उसे कई प्रकार की सावधानियां रखना आवश्यक होता है ताकि उसके गर्भ में पल रहा शिशु स्वस्थ और सुन्दर हो. इसी विषय पर वास्तु शास्त्र में भी कुछ उपाए बताए गए जो गर्भवती स्त्री के लिए बहुत फायेदेमंद सिद्ध होते है. आइये जानते है वह उपाए कौन से है?

दक्षिण-पश्चिम दिशा वाला कमरा
वास्तु शास्त्र में गर्भवती स्त्री को दक्षिण-पश्चिम दिशा वाले कमरे में सोना उचित माना गया है क्योंकि इस कमरे में सोने से उसे बच्चे को जन्म देने में किसी प्रकार की कोई परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है. तथा गर्भवती स्त्री को हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए की वह अपना सिर दक्षिण दिशा की तरफ करके ही सोए.

नीले रंग की रौशनी 
गर्भवती स्त्री के कमरे में हल्के नीले रंग की प्रकाश की व्यवस्था करना उचित होता है क्योंकि नीला रंग आँखों के लिए आरामदायक माना जाता है.

लाल काला तथा नारंगी रंग 
गर्भवती स्त्री को अपने गर्भकाल के दौरान लाल, काले और नारंगी रंगों का उपयोग नहीं करना चाहिए. क्योंकि इन गहरे रंगों से तनाव उत्पन्न होता है जो गर्भवती स्त्री और उसके बच्चे के लिए ठीक नहीं होता है. 

किताबें पढ़ें 
वास्तु शास्त्र में गर्भवती स्त्री को कोई भी धार्मिक या प्रेरणादायक किताबें पढ़ना लाभदायक माना जाता है क्योंकि इन किताबों का प्रभाव उसके होने वाले शिशु पर पड़ता है जिससे उसमे सकारात्मकता आती है.

तनाव मुक्त रहें 
गर्भवती स्त्री तनाव मुक्त रहे इसके लिए उसके कमरे में किसी बच्चे की तस्वीर लगा देना चाहिए. जिससे उसके मन में सकारात्मकता का भाव उत्पन्न होता है. और कभी भी गर्भवती स्त्री को किसी अँधेरे या सूने कमरे में नहीं जाना चाहिए या बैठना चाहिए ये उसके लिए तनाव उत्पन्न करते है.

 

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