आदमी की अपनी जिन्दगी नहीं

ांवों में जा कर देखिये आराम बहुत है.. 
दिल को सुकूं देने के इंतजाम बहुत है.. 
शहरों में आदमी की अपनी जिन्दगी नहीं, 
जिससे भी पूछो कहते हैं काम बहुत है..

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