एक सत्यता : अधर्म से किया गया विकास एक दिन विनाश में परिवर्तित होता है

एक सत्यता : अधर्म से किया गया विकास एक दिन विनाश में परिवर्तित होता है

आज इस संसार की स्थति दिन प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है.आज मानव का उद्देश्य केवल पैसा कमाने तक सीमित सा होता जा रहा है .पैसा कमाना ,स्वयं का विकास करने के लिए लोग जाने कितने गलत कदम भी उठाने लगा है ,अधर्म ,अनीति से आगे बढ़ने की पूर्ण कोशिश में लगा हुआ है .शायद वह यह भूल बैठा है की ईमानदारी और मेहनत से कमाया गया धन हमेशा अच्छे कार्यों में काम आता है साथ ही साथ अधिक समय तक हमारे पास रहता है. और अनीति -अधर्म से कमाया गया धन निश्चित रूप से किसी गलत कार्य में फसने या अचानक कोई बड़ी समस्या या गलत कार्यों के लिए ही काम आता है .अनीति से कमाया धन पुरे परिवार के लिए बाधक बन जाता है. लोग समझ नहीं पाते की कई बार इस धन की वजह से हमारे बच्चे भी गलत कार्य करने या उस पैसा का गलत उपयोग करने ,साथ ही साथ किसी न किसी समस्या का शिकार हो सकते है .

किसी ने यह सच ही कहा है -

जैसा खाओगे अन्न ,
वैसा होगा मन ,

यह बिलकुल सात्विक सत्य है की चाहे देर भले ही हो जाए पर अनीति से कमाया गया धन आपको कंगाल कर देगा,आपके मन, सम्मना को धो देगा, आपको कहीं के न छोड़ेगा ,साथ ही साथ यह भी सत्य है की इस जन्म तो इस जन्म अगले जन्म में भी इसका प्रभाव पड़ता है ,आपकी आने वाली पीढ़ी पर इसका बुरा असर होता है .

ईमानदारी और धर्म  से कमाने वाला भले ही लाखों ख़र्च न करे पर जीवन में शांति और सम्मान से सर ऊंचा करके जीता है .
आप यह भी जान लें की यह संसार क्षणभंगुरता को धारण किये हुए है एक न एक दिन आपको यहां से विदा लेना ही है .फिर तो आपका यह धन यहीं पड़ा रह जाएगा साथ कुछ नहीं जाने वाला इस लिए आप धर्म और ईमानदारी से आगे बढ़ें उसी में आपका जीवन सफल है.