सोमवार को ही भगवान शिव आखिर क्यों पूजे जाते है, जानें इस रहस्य के बारे में

हिन्दू धर्म में सभी दिनों का धार्मिक महत्व है ऐसा कोई भी दिन नहीं है जो किसी देवी देवता से सम्बंधित ना हो हर दिन किसी विशेष देवी देवता की पूजा की जाती है, लेकिन ऐसा कोई भी दिन नहीं है जब शंकर भगवान की पूजा न की जाती हो. इसी सम्बन्ध में शिव महापुराण में एक श्लोक दिया गया है –

आरोग्यंसंपद चैव व्याधीनांशांतिरेव च।
पुष्टिरायुस्तथाभोगोमृतेर्हानिर्यथाक्रमम्॥

 
अर्थात स्वास्थ, सपत्ति,रोगों का नाश,पुष्टि, आयु, भोग और मृत्यु की हानि के लिए निरंतर सातों दी भगवान शंकर की पूजा की जा सकती है. किन्तु सोमवार को महादेव का दिन माना गया है तथा ये दिन शंकर भगवान् की पूजा का विशेष दिन होता है ये परंपरा सदियों से चली आ रही है.

तो आइये आज हम आपको बताते है की शंकर भगवन की पूजा सोमवार के दिन क्यों की जाती है.

हमारे पुराणों के अनुसार सोम अर्थात चन्द्र जिन्हें भगवान् शंकर ने अपने शीश पर धारण किया है. माना जाता है की जिस प्रकार चन्द्र को कई गलतियों एवं कमियों के पश्चात भी उसे क्षमादान देकर भगवान शंकर ने अपने शीश पर धारण किया है उसी प्रकार हमें भी भगवान् शंकर क्षमा कर अपने चरणों में स्थान प्रदान करेंगे. इसी को याद रखने के लिए लोगों ने सोमवार को भगवान् शंकर का दिन माना है.

भगवान शंकर का स्वाभाव सौम्य एवं दयालु प्रवृति होने के कारण भी सोमवार को भगवान शंकर का दिन मानते है क्योकि सोम अर्थात सौम्य भी होता है जो भगवान शंकर का गुण है.

भगवान शिव साक्षात् ॐ कार है और ॐ कार की उपासना करने से व्यक्ति के सारे कष्ट कट जाते है. सोमवार के उच्चारण में ॐ का उच्चारण स्वत ही आ जाता है इसलिए भी सोमवार को भगवान शिव का दिन मानते है. 

 

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