नाग-नागिन के इस मंदिर का इतिहास किसी फिल्म से कम नहीं

भारत में नाग-नागिन को बहुत ही पवित्र व देवतुल्य माना जाता है इसी वजह से यहाँ इनके कई मंदिर स्थापित किये गए है. भारत में बहुत सी धार्मिक फिल्मे भी नाग-नागिन पर बनाई गई है. लेकिन नाग-नागिन का एक मंदिर ऐसा भी है जो फिल्मों की कहानियों को भी पीछे छोड़ देगा.आइये जानते है इस मंदिर की कहानी क्या है?

भारत के मध्यप्रदेश राज्य के ग्वालियर शहर के पास एक ऐसा मंदिर है जो नाग-नागिन के प्रेम कि मिशाल है इस मंदिर की विशेषता यह है की यहाँ हिन्दू और मुस्लिम दोनों ही आकर इन नाग-नागिन के जोड़े की पूजा करते है. कहा जाता है की वर्ष 2015 में एक दिन ग्वालियर के ट्रांसपोर्ट नगर के गेट नंबर एक के पास नाग-नागिन का एक जोड़ा रोड़ पार कर रहा था तभी एक ट्रक की चपेट में आकर नाग की मौत हो गई.

उस नाग की मृत्यु के बाद नागिन ने उसी के पास ही अपना डेरा जमा लिया जिससे की उस रोड पर बहुत लम्बा जाम लग गया तब उस नागिन को वहां से हटाने के लिए सांप पकड़ने वाले को बुलाया गया जिसने उस नागिन को वहां से हटाकर जंगल में छोड़ दिया.लेकिन इसके बाद अगले दिन उस नागिन ने उसी स्थान पर जहाँ नाग की मृत्यु हुई थी आकर अपने प्राण त्याग दिए.

अपने प्रेमी नाग के वियोग में दम तोड़ने के बाद स्थानीय लोगों के द्वारा पूर्ण विधि विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया. और उनके शरीर को ले जाकर गंगा नदी में प्रवाहित कर दिया. इन दोनों के प्रेम को देखकर व इससे प्रभावित होकर स्थानीय लोगों ने वहां एक मंदिर का निर्माण करवाया जिसमे नाग-नागिन की मूर्ती स्थापित कर दिया. इस स्थान पर हर वर्ष नाग पंचमी के दिन भव्य मेले का आयोजन किया जाता है जहाँ सैकड़ों की संख्या में लोग जमा होते है और इस नाग-नागिन के मंदिर के दर्शन करते है.

 

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