नारियल चढाने से होती है मनोकामना पूरी

उज्जैन से करीब 5 किमी दूर बसा है भगवान चिंतामन गणेश का धाम जहां एक छत के नीचे भक्तों को एक नहीं बल्कि तीन-तीन गणपति के एक साथ दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होता है. एक तरफ जहां दिखते हैं चिंतामणी गणेश जो भक्तों के समस्त दुख, समस्त चिंताओं को हरने वाले माने जाते हैं तो वहीं सिद्धी गणेश और इच्छामन गणेश भी मंद मंद मुस्कान के साथ करते हैं अपने भक्तों का स्वागत. विशेष बात ये है कि चिंतामणी भगवान के इस रूप उनका मुख ही दिखता है.

उज्जैन में बने इस मंदिर में अगर बाप्पा की मूरत अनूठी है तो वहीं पार्वती पुत्र के इस मंदिर में पूजा का विधि विधान भी कुछ कम अनोखा नहीं है. भक्तों का मानना है कि किसी भी मंगल कार्य के आरंभ होने से पहले अगर एक नारियल और मंगल कार्य का निमंत्रण बाप्पा के चरणों में रख दिया जाए तो उस कार्य के निर्विघ्न पूरा होने की गारंटी होती है.

यही वजह है कि जहां एक तरफ पूजा के बाद मंदिर की दीवार पर उल्टा स्वास्तिक बनाकर गणपति तक पहुंचायी जाती है अपनी मनोकामना और इच्छा पूरी होने पर भक्त यहां आकर बनाते हैं सीधा स्वास्तिक. तो वहीं दूसरी ओर कुछ भक्त मौली बांधकर भी बाप्पा से कहते हैं अपनी इच्छा.

उज्जैन के चिंतामणि गणेश को प्रसन्न करना और उनसे मनचाहा आशीर्वाद पाना बेहद आसान है. मोतीचूर के लड्डू से भगवान की आराधना कर मंदिर के पीछे की दीवार पर उल्टा स्वस्तिक बना दिया जाए तो मुराद पूरी होते देर नहीं लगती. कहते हैं यहां त्रेतायुग में भगवान राम और सीता मैय्या गणपति का आशीर्वाद मांगने के लिए आए थे.

तुलसी को हो गया था गणेशजी से प्यार

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