शालिग्राम मंदिर का रहस्य

शालिग्राम दुर्लभ किस्म के चिकने और आकार में बहुत छोटे पत्थर होते हैं. ये शंख की तरह चमकीले होते हैं. शालिग्राम को भगवान विष्णु का रूप माना है. वैष्णव इनकी पूजा करते हैं. ये रंग में भूरे, सफ़ेद या फिर नीले हो सकते हैं. आमतौर पर शालिग्राम नेपाल के काली गंडकी नदी के तट पर पाए जाते हैं. कहते हैं कि एक पूर्ण शालिग्राम में भगवाण विष्णु के चक्र की आकृति अंकित होती है.

आज हम बिहार के एक मंदिर में स्थापित ऐसे शालिग्राम पिंडी के बारे में बता रहे हैं, जिसका आकार पहेली बना हुआ है. ये पिंडी, पश्चिम चंपारण के बगहा पुलिस जिला स्थित पकीबावली मंदिर में है. कहते हैं कि आज से 200 साल पहले नेपाल नरेश जंग बहादुर ने इसे भेंट किया था. तब इस शालिग्राम पिंडी का आकार मटर के दाने से कुछ बड़ा था. इसे लाकर यहां बावली किनारे मंदिर में रख दिया गया. आज पिंडी का आकार नारियल से दो गुना बड़ा है.

अभी भी इसका आकार लगातार बढ़ ही रहा है. यहां के लोग इसे ज़िंदा शालिग्राम मानते हैं. वैज्ञानिकों ने भी पिंडी के आकार बढ़ने को लेकर स्टडी की, पर आकार बढ़ने के पीछे का रहस्य नहीं खुल पाया.

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