जानिए क्यों है चिंता चिता के समान

आजकल की दिनचर्या में व्यस्तता इतनी बढ़ गयी है कि टाइम मैनेजमेंट की सारी कोशिशे निष्फल होती नज़र आती है | इन कोशिशों के विफल होने के कारण जीवन में आता तनाव, चिंता,आत्म-विश्वास की कमी और मानसिक संतुलन का बिगड़ना जिससे मनुष्य के डिप्रेशन अर्थात अवसाद में जाने का खतरा बढ़ जाता है |

 कभी- कभी अवसाद के कारण आप के साथ-साथ ही आप अपने प्रियजनों का भी अहित कर देते है जिसमे होने वाली क्षति की कोई सीमा नहीं होती है | आइये जानते है अवसाद से बाहर आने में मददगार कुछ सहायक क्रियाकलापों के बारे में |

 सकारात्मक सोच - बेहद जरूरी है की आप अपने विचार और व्यव्हार में सकारात्मक मिज़ाज़ बनाकर रखे इससे आपके आस पास रहने वाले लोगो पर भी आपका अच्छा प्रभाव पड़ेगा और चिंता काम होने में सहायता मिलेगी | 

हंसी-मज़ाक करना - काम को लेकर सीरियसनेस और जल्दबाज़ी भरे व्यवहार के कारण आपमें अकेलापन और उदासी का गुण आने लगता है इससे दुर्र रहिये और अपने आस पास सदैव हंसी और ख़ुशमिज़ाजी का माहौल बना कर रखे |

योगा : योगा अभी बहुत चलन में है और इससे आपको मानसिक और शारीरिक कई लाभ भी मिलते है | जिससे आप अपना मूड को फ्रेश रख सकते है |

मेडीटेशन : मन को शांत कर मनन- चिंतन करना आपको अवसाद में सबसे ज्यादा लाभ देता है |

कुछ नया करने का विचार : यदि आप अपने कार्य से हैट कर कुछ नया करते है तो इससे आपके मस्तिष्क को बदलाव महसूस होगा और कुछ नया करने में आपकी दिनचर्या में भी परिवर्तन आएगा जो आपमें सकारात्मकता लाएगी |

 

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