साधारण मैकेनिक से बुर्ज खलीफा में 22 फ्लैट्स की असाधारण कहानी...

इंसान जिस दिन अपने सपनों को मार कर जीना सिख जाता है उस समय वो इंसान मरने से पहले आधा मर चूका है, लेकिन विपरीत इसके कुछ लोग ज़िंदगी को हर पल, हर समय कठिन चुनौतियां देते रहते है और इससे पार होते रहते है, ऐसे लोगों में दुनिया को बदलने की क्षमता होती है, और ये क्षमता कोई भी माँ के पेट से सीखकर नहीं आता है, बल्कि यह क्षमता आती है जूनून से, सपनो को पूरा करने की जिद से, ऐसी ही एक जिद को पाल कर बैठे थे केरल के रहने वाले जॉर्ज वी. नेरीपराम्बिल.

जार्ज ने वैसे तो सपने में भी नहीं सोचा था कि एक दिन ज़िंदगी में वो इस मुकाम पार पहुंच जाएंगे जब दुनिया की सबसे ऊँची बिल्डिंग बुर्ज खलीफा में उनके अपने नाम से 22 फ्लैट होंगे. कभी एक साधारण से मैकेनिक रहे जार्ज को एक दिन उनके ही किसी रिश्तेदार ने मजाकिया लहजे में कहा था कि तुमने कभी बुर्ज खलीफा देखा भी है, तुम उसमें प्रवेश भी नहीं कर सकते. इन्हीं शब्दों को दिल में हमेशा के लिए दबा कर एक सपने को अपने भीतर जन्म देकर जार्ज ने ज़िंदगी में फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. 

आज जार्ज कई कंपनियों के मालिक है. जॉर्ज आज स्‍थापित उद्योगपति हैं. वे जियो ग्रुप ऑफ कंपनीज के फाउंडर हैं. यह मिडिल-ईस्‍ट की सबसे बड़ी कंपनियों में एक है. उनका साफ मानना है कि दुनिया में कोई भी चीज असंभव नहीं होती, क्‍योंकि हर असंभव चीज संकल्‍प और कठिन मेहनत के बाद संभव हो जाती है.जॉर्ज कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड के दूसरे सबसे बड़े शेयरहोल्‍डर हैं. इसमें उनकी 14 फीसदी हिस्‍सेदारी है. यह एयरपोर्ट भारत में पीपीपी (सरकारी-निजी हिस्‍सेदारी) मॉडल के तहत बनने वाला पहला एयरपोर्ट है. जार्ज की कहानी हम सबको सीख देती है कि हम भी चाहे तो ज़िंदगी में सब कुछ कर सकते है बस हौसले को अपने अंदर बचाकर रखना जरुरी है. 

Editor Desk: हर दिन हौसले की सैकड़ों कहानी लिखती है 'मारूफ' की ज़िंदगी

Editor Desk: तकलीफों से लड़ती 'आशा' की ज़िंदगी

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