इस गांव में बड़ी मुश्किल से निकल सका दूल्हे का बाना

इंदौर के पास देपालपुर के शहावदा गांव में एक दूल्हे को मंदिर में प्रवेश और बाना निकालने के लिए रोका गया. दूल्हे को सिर्फ इसलिए रोका गया क्योंकि वह दलित वर्ग का था. इस तरह की समस्या समाज में जातिगत भेदभाव को जन्म देती है और समाज के विकास के लिए ठीक नहीं है. गाँव के लोगों को जब पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों  ने एक सप्ताह तक समझाया तब जा कर रविवार को दूल्हे का बाना निकल पाया.

पुलिस और प्रशासन के सामने ये मामला तब आया जब दलित वर्ग के साथ भेदभाव होने के संबंध में पुलिस को ज्ञापन मिला. इसके के बाद पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए गांव में समाज के लोगों की बैठक बुलाई और समझाया. पुलिस को ये ज्ञापन बलाई समाज के लोगों ने दिया था. समाज के लोगों ने ज्ञापन देकर आशंका जताई थी कि गांव के कलोता वर्ग के लोग मंदिर में प्रवेश नहीं करने देंगे. हालांकि दोनों पक्षों के बीच सहमति बनने के बाद रविवार को दोपहर में बाना निकल सका. इस बाने में  पुलिस भी सादी वर्दी में शामिल हुई. बाना निकालने  के लिए इस दौरान एहतियातन प्रशासन  के प्रतिनिधि भी गांव में रहे. 

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