पाकिस्तान में एक लाख पश्तून सरकार के खिलाफ

पाकिस्तान के हालत ख़राब होते जा रहे है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय से संघ प्रशासित कबायली इलाके (फाटा) में युद्ध अपराध मामलों में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग कर रहे  एक लाख पश्तूनों ने रविवार को सरकार के खिलाफ विशाल रैली निकाली. खैबर पख्तून ख्वाह और फाटा से हजारों की संख्या में लोग पिशताखरा चौक पर जमा हुआ और उन्होंने 'यह किस तरह की आजादी' का नारा लगाया. पाकिस्तान के समाचार पत्र डॉन के अनुसार इस रैली में लापता हुए लोगों के परिवार ने भी हिस्सा लिया. उनके हाथ में लापता लोगों की तस्वीरें भी थीं. इस दौरान पीटीएम के नेता मंजूर पश्तीन ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा, 'हम सिर्फ दमन करने वालों के खिलाफ हैं. हम सिर्फ अपने देश के एजेंट हैं. लापता लोगों के लिए अब तक क्या किया गया है. मां और बुजुर्गों जिनके अपने खोए हैं उन्हें मजबूर नहीं किया जा सकता. लापता लोगों के परिजन अपने प्रियजनों की तस्वीर लिए मार्च में शामिल हुए.

बताया जा रहा है कि सोशल मीडिया के जरिये इतनी बड़ी संख्या में लोग पाकिस्तान की सड़कों पर उतरे और स्थानीय लोगों को सरकारी दमन के बारे में बताया. हालांकि पाकिस्तान की टेलीविजन मीडिया में इतने बड़े धरना प्रदर्शन को नजरअंदाज किया गया. पश्तूनों की पाकिस्तान सरकार से यह भी मांग है कि संघ प्रशासित कबायली इलाके कर्फ्यू खत्म किया जाना चाहिए. स्कूल कॉलेज और अस्पताल खुलने चाहिए क्योंकि इससे इस इलाके में आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है. कर्फ्यू हटने के बाद ही पश्तूनों का जीवन सामान्य हो सकता है. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनके समुदाय के मानवाधिकारों का पाकिस्तान उल्लंघन कर रहा है और उन्हें आजादी मिलनी चाहिए. पश्तून आंदोलन के नेता 26 वर्षीय मंजूर पश्तीन हैं, जो जनजातीय इलाके के वेटनरी छात्र हैं. उनके उदय को एक नए सीमांत गांधी के रूप में देखा जा रहा है.  उनका कहना है कि 'हम हिंसा में यकीन नहीं करते हैं, न तो हम आक्रामक भाषा का इस्तेमाल करते हैं और न ही हिंसा का हमारा इरादा है. अब यह सरकार पर है कि वह हमें अपने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के हक का इस्तेमाल करने देती है या हमारे खिलाफ हिंसक तरीका अपनाती है.'

पश्तीन दक्षिण वजीरिस्तान से ताल्लुक रखते हैं, जो पश्तून बहुल संघ प्रशासित जनजातीय इलाके (फाटा) का हिस्सा है. पीटीएम कुछ दिन पहले तब सुर्खियों में आया था, जब जनजातीय इलाके के हजारों लोगों का नेतृत्व करते हुए कराची में एक युवा पश्तून की सिंध पुलिस द्वारा हत्या का विरोध करते हुए वे इस्लामाबाद पहुंचे थे.

 

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