काल बनता जा रहा वायु प्रदुषण, हर साल होती है 70 लाख लोगों की मौत

नई दिल्ली: घर के अंदर और बाहर वायु प्रदूषण एक मूक और अदृश्य हत्यारा बनता जा रहा है और यह हर साल 70 लाख लोगों की असामयिक मौत के लिए जिम्मेदार है, मरने वालों में छह लाख बच्चे भी शामिल हैं. पर्यावरण और मानवाधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत डेविड आर. बॉयड के मुताबिक, छह अरब से ज्यादा लोग इतनी प्रदूषित हवा में सांस ले रहे हैं, जिसने उनके जीवन, स्वास्थ्य और बेहतरी को संकट में डाल दिया है. इसमें एक-तिहाई तादाद बच्चों की है.

बॉयड ने जेनेवा में मानवाधिकार परिषद के दौरान कहा है कि, "कई सालों तक प्रदूषित हवा में सांस लेने की वजह से कैंसर, सांस की बीमारी या हृदय की बामारी झेलने के बाद, हर घंटे 800 लोग मारे जा रहे हैं. फिर भी इस तरह पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है, क्योंकि ये मौतें उस तरह नाटकीय नहीं हैं, जैसी अन्य आपदाओं या महामारी से होने वाली मौतें होती हैं."

उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण एक ऐसी समस्या है, जिसे जरूर रोका जा सकता है. इसके साथ ही उन्होंने स्वच्छ हवा सुनिश्चित करने के लिए कानूनी दायित्वों को निभाने की भी अपील की, जो जीवन, स्वास्थ्य,  जल एवं स्वच्छता, उचित घर और एक स्वस्थ वातावरण के अधिकारों को पूरा करने के लिए अनिवार्य है.

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