56 भोग से मानव को सांसारिक भोगो से मिलती है निवृति

Jan 15 2016 07:59 PM
56 भोग से  मानव को सांसारिक भोगो से मिलती है निवृति

हिन्दू धार्मिक परम्परा में धार्मिक नियमावली को अपनाकर नियमों का अनुसरण कर हम अपने जीवन को धन्य बना सकते है. बस हमारे मन की आस्था और विचारों में शुद्धीकरण होना चाहिए . हिन्दू धर्म में अपने -अपने इष्ट की उपासना करने की कुछ विशेष नियमावली होती है. और इसी नियमावली का अनुसरण करने से मानव को सदगति प्राप्त होती है.

बस हमारे मन के भावों की प्रधानता है. जो हमें इन सबके लिए आगे बढ़ाती है.इसी नियमावली को आगे बढ़ाते हुए हम आपको 56 भोग की महत्वता और परम्परा से अवगत कराते है. जो सदियों पुरानी है। यह परंपरा प्राचीन काल से जारी है, इसका उल्लेख हिंदू पौराणिक ग्रंथों में मिलता है। कुछ विद्वानों का मत है कि यह परंपरा तब शुरु होगी, जब इतने ही पकवान बनते होंगें।

हिन्दू धार्मिक ग्रन्थ श्रीमद्भभागवत पुराण में 56 भोग के बारे में विवरण है। इस पुराण के अनुसार बताया जाता है कि एक बार गोपियों ने लगातार एक माह तक यमुना में प्रातःकाल स्नान किया। और मां कात्यायनी की आराधना की, क्योंकि वो श्रीकृष्ण जैसे पति की चाह रखती थीं। उनकी मनोकामना पूर्ण होने पर उन्होंने 56 प्रकार का भोग श्रीकृष्ण को अर्पित किया था। तभी से यह परंपरा चली आ रही है। 

यदि आप भी इन्ही गोपियों की तरह मन के भाव को विशुद्ध रखकर भगवान को 56 भोग अर्पित करते है. तो आपका जीवन भी सुखद और सम्पन्नता के साथ व्यतीत होगा. और आप को इस संसार सागर से सदगति मिल सकती है. आप इस संसार के आवागमन से मुक्त हो सकते है.

ये प्रमुख व्यंजन ही है भगवान के 56 भोग-

भात, दाल, चटनी, कढ़ी, दही, सिखरन, शरबत, बाटी, मुरब्बा, शर्करा युक्त, बड़ा, मठरी, फेनी, पूरी, खजला, घेवर, मालपुआ, चोला, जलेबी, मेसू, रसगुल्ला, पगी हुई, रायता, थूली, लौंगपूरी, खुरमा, दलिया, परिखा, सौंफ युक्त, बिलसारू, लड्डू, साग, अचार, मोठ, खीर, दही, गोघृत, मक्खन, मलाई, रबड़ी, पापड़, सीरा,लस्सी, सुवत, सुपारी, इलायची, फल, तांबूल, मोहन भोग, नमक, कषाय, मधुर, तिक्त, कटु, अम्ल। इन सभी 56 भोगों का उल्लेख श्रीमद् भागवद् पुराण में मिलता है। इनकी बहुत ही अधिक महत्वता होती है .