देश के इस जिले को आज़ादी के 3 साल बाद मिली थी अंग्रेज़ो से आज़ादी

रायसेन: आपको जान के हैरानी होगी की भले ही हमारे देश को 15 अगस्त 1947 को आज़ादी मिल गई थी. लेकिन देश में एक जिला इस भी है जिसे आज़ादी के तीन साल बाद यानी की 1950 में अंग्रेजो से आज़ादी प्राप्त हुई थी. मध्यप्रदेश का रायसेन जिले के सैकड़ों नौजवानों ने भोपाल रियासत के नबाब की यतानाएं झेली, तब जाकर जिला स्वतंत्र भारत के मध्यभारत प्रांत में शामिल हो पाया.

आजादी के संस्मरण साझा करते हुए नगर के वयोवृद्घ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित रामनारायण चतुर्वेदी ने बताया कि वर्ष 1942 में जब वह स्कूल पढ़ाई कर रहे थे, उन्हें स्वाधीनता संग्राम में शामिल होने का अवसर मिला, इस दौरान चूकिं वह पूर्व वयस्क नहीं थे, तो उन्हें सूचनाओं के अदान-प्रदान की जिम्मेदार सौंपी गई थी. 15 अगस्त 1947 को देश तो आजाद हो गया, लेकिन भोपाल रियासत के नबाब हमीददुल्ला ने स्वाधीन भारत से खुद को अलग रखा और भोपाल सहित रायसेन व सीहोर जिले में नबाबी शासन जारी रहा.

इसके बाद जिले के उदयपुरा क्षेत्र के बौरास घाट से जिले की आजादी के लिए आंदोलन का आगाज हुआ, जिसे नबाबी शासन ने कुचलने का काफी प्रयास किया, इसमें कई नौजवान शहीद हुए. कईयों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया गया, जहां उन्हें तरह-तरह की यतनाएं दी गई, लेकिन नर्मदा तट से उठी आजादी की चिंगारी तमाम यतनाओं के बावजूद बुझने की बजाए और धधकती गई. अंततः वर्ष 1950 में नबाव हमीदुल्ला ने खुद की रियासत को स्वाधीन भारत के आधीन करते हुए मध्य भारत प्रांत में शामिल कराया. इस तरह रायसेन जिले के रहवासियों देश आजाद होने के तीन साल बाद स्वाधीनता मिली थी.

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