कोरोना के कारण चरमराई देश की अर्थव्यवस्था, 12.34 लाख करोड़ तक पहुंचा राजकोषीय घाटा

Feb 27 2021 02:29 PM
कोरोना के कारण चरमराई देश की अर्थव्यवस्था, 12.34 लाख करोड़ तक पहुंचा राजकोषीय घाटा

नई दिल्ली: कोरोना संक्रमण के कारण ठप्प हुई आर्थिक गतिविधियों के चलते सरकार की कमाई कम हो गई है. इस कारण राजकोषीय घाटा लगातार बढ़ रहा है. दरअसल सरकार को अब इकॉनमी को पटरी पर लाने के लिए अधिक खर्च करना पड़ रहा है. इस हिसाब से उसके पास संसाधन नहीं आ रहे हैं. यही कारण है कि राजकोषीय घाटे पर नियंत्रण रखना कठिन हो रहा है.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा वित्त वर्ष ( 2020-21) जनवरी के अंत तक केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा 12.34 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. यह संशोधित बजट आंकलन का तक़रीबन 66.8 फीसदी है. पिछले वित्त वर्ष 2019-20 में जनवरी के अंत तक राजकोषीय घाटा संशोधित आकलन के 128.5 फीसदी के लगभग पहुंच गया था. शुक्रवार को कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स (CGA) ने यह आंकड़ा जारी किया है. CGA की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा वित्त वर्ष के अंत 31 मार्च 2021 तक राजकोषीय घाटा GDP के 9.5 फीसदी यानी लगभग 18.48 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. सीजीए के अनुसार, मौजूदा वित्त वर्ष में जनवरी के आखिर तक राजकोषीय घाटा 12,34,004 करोड़ रुपये का रहा.

बता दें कि गत वर्ष कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए देश भर में लॉकडाउन लागू किया गया था. इसके चलते आर्थिक और कारोबारी गतिविधियों पर बहुत व्यापक असर पड़ा. इस कारण सरकार का राजस्व घट गया था. चालू वित्त वर्ष के लिए खर्च और राजस्व के बीच का अंतर या राजकोषीय घाटे का जो वार्षिक लक्ष्य निर्धारित किया गया था, वह गत वर्ष जुलाई 2020 में ही पार हो गया था. सरकार को जनवरी 2021 तक 12.83 लाख करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जो संशोधित आकलन का लगभग 80 फीसदी है. इसमें 11.01 लाख करोड़ का टैक्स रेवेन्यू है.

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