जानिए पतित पावनी मां गंगा के 10 ऐतिहासिक तथ्य

भारत में गंगा नदी को सबसे पवित्र नदी कहा जाता है। ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा त्यौहार मनाया जाता है। इस दिन मां गंगा का भूमि पर अवतरण हुआ था। इस साल यह 20 जून 2021 को मनाया जाएगा। मां गंगा के 5 पौराणिक तथा 5 ऐतिहासिक तथ्य।

1- गंगा दशहरा के दिन हुआ गंगा अवतरण: पुराणों के मुताबिक, वैशाख शुक्ल सप्तमी तिथि को मां गंगा स्वर्गलोक से सबसे पहले महादेव की जटाओं में पहुंची तथा फिर धरती गंगा दशहरा के दिन धरती पर उतरीं।

2- जाह्‍नु ऋषि की पुत्री: जैसे राजा दक्ष की बेटी माता सती ने हिमालय के यहां पार्वती के नाम से जन्म लिया था उसी प्रकार माता गंगा ने अपने दूसरे जन्म में ऋषि जह्नु के यहां जन्म लिया था।

3- हिमवान की पुत्री: एक अन्य कथा के मुताबिक, गंगा पर्वतों के राजा हिमवान तथा उनकी पत्नी मीना की पुत्री हैं, इस तरह वे देवी पार्वती की बहन भी हैं। कुछ स्थानों पर उन्हें ब्रह्मा के कुल का बताया गया है।

4- स्वर्ग से भूमि पर उतरी गंगा: पौराणिक शास्त्रों के मुताबिक, गंगा अवतरण हेतु ऋषि भागीरथ ने घोर तपस्या की। उनकी कठोर तपस्या से खुश होकर ब्रह्माजी ने गंगा की धारा को अपने कमंडल से छोड़ा। तब महादेव ने गंगा की धारा को अपनी जटाओं में समेटकर जटाएं बांध लीं। तत्पश्चात, भगीरथ की आराधना के पश्चात् उन्होंने गंगा को अपनी जटाओं से मुक्त कर भूमि पर उतार दिया।

5- विष्णु के कमंडल से प्रकट हुई गंगा: यह भी बताया जाता है कि गंगा का जन्म ब्रह्मा के कमंडल से हुआ था। यानी यह कि गंगा नामक एक नदी का जन्म। एक अन्य कथा के मुताबिक, ब्रह्माजी ने विष्णुजी के चरणों को आदर समेत धोया तथा उस जल को अपने कमंडल में एकत्र कर लिया। प्रभु श्री विष्णु के अंगूठे से गंगा प्रकट हुई अतः उसे विष्णुपदी बोला जाता है।

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