कम बारिश के कारण काम में नहीं आए 10 लाख टन बीज

मानसून के सुस्त माहौल के चलते कहीं किसानों को फसल के उत्पादन की चिंता सता रही है तो कहीं लोगों को बढ़ते अनाज की कीमते. इस दौरान ही यह भी सुनने में आ रहा है कि देश के कई राज्यों में लगभग 10 लाख टन बीज (खरीफ फसल) बिना किसी उपयोग के रखे हुए है. और अब इस बात के भी अनुमान कम ही लगाये जा रहे है कि अब फिर से बारिश का रुख फसल की तरफ होगा. बात करे महाराष्ट्र की तो यहाँ कहा जा रहा है अगर मानसून फिर से आया भी तो इन बीजों का उपयोग बोआई में होने के असर कम है.

मामले में ही महाराष्ट्र कृषि विभाग के अधिकारीयों का कहना है कि चालू वर्ष में खरीफ सीजन के लिए सरकार के द्वारा 17,36,420 क्विंटल बीज के साथ ही 14,99,055 क्विंटल बीज ज्‍वार, बाजरा, धान, मक्‍का, तुअर, मूंग, तिल, सोयाबीन और कपास के लिए सप्‍लाई किए गए थे. साथ ही यह भी बताया है कि इसमें से भी करीब 10 लाख क्विंटल बीज फिर भी बच गए है. इसके साथ ही देश के का इलाकों से यह खबर भी सुनने को मिली है कि बारिश कम होने की वजह से खरीफ फसल की बोआई भी सही नहीं हो पाई है.

यहाँ तक की कुछ मामलों में तो यह भी सामने आया है कि किसानों ने अपने पास रखे हुए बीजों का ही इस्तेमाल किया है और सरकार से लिए गए बीज बिना किसी उपयोग में लए ऐसे ही रह गए. सूत्रों ने यह भी बताया है कि महाराष्ट्र में 97 प्रतिशत ही खरीफ फसल की बुआई हो पाई है. राज्य सरकार का यह कहना है कि यदि निरंतर बारिश नहीं हुई तो फसलों में बेहतर विकास भी नहीं हो पायेगा. कुछ ऐसा ही आलम देश के हर राज्य में देखने को मिल रहा है. किसानों का कहना है कि यदि बारिश का यह आलम सीजन के आखिरी समय में भी ऐसा ही रहता है तो पैदावार अच्छी नहीं हो पायेगी.

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