विश्व आदिवासी दिवस : 9 अगस्त को ही क्यों मनाया जाता है विश्व आदिवासी दिवस ?

हर साल 9 अगस्त का दिन आदिवासियों के लिए बहुत ख़ास होता है. क्योंकि इस दिन को विश्व आदिवासी दिवस के रूप में मनाया जाता है. आदिवासी दिवस को 9 अगस्त को मनाए जाने का फैसला 9 अगस्त 1982 को संयुक्त राष्ट्र संघ के बैठक में लिया गया था. पहली बार विश्व आदिवासी दिवस 1995 में मनाया गया था. इसके बाद से हर वर्ष यह 9 अगस्त को मनाया जाने लगा. 

आदिवासी भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म का एक अभिन्न अंग है. आज के समय में आदिवासियों ने खुद को साबित करने का काम किया है. यूं तो आदिवासी भारत में हर जगह पाए जाते हैं, लेकिन झारखंड, अरूणाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, मेघालय,त्रिपुरा, मध्यप्रदेश, मणिपुर और मिजोरम में इनकी अच्छी-ख़ासी आबादी है. 

आदिवासी अपने लोकगीत, संगीत और नृत्य से हर किसी का मन मोह लेते हैं. यह इनकी ख़ूबी भी है. शहरों से अधिक गांवों में इनकी आबादी देखने को मिलती है. आज के समय में भारत के तरक्की में इनका महत्वपूर्ण स्थान है. आपको इस बात से भी अवगत करा दें कि अमेरिकी महाद्वीप, अफ्रीकी महाद्वीप तथा एशिया महाद्वीप में भी आदिवासी निवास करते हैं. यहां पर ये बड़ी संख्या में पाए जाते हैं.

भारत के अलग-अलग राज्यों में आदिवासी जनसंख्या...

भारत में कुल 10 करोड़ आदिवासी रहते हैं. भारत की कुल आबादी का 8.6 फीसदी हिस्सा आदिवासियों का है. 

झारखंड 26.2 % पश्चिम बंगाल 5.49 % बिहार 0.99 % सिक्किम 33.08% मेघालय 86.01% त्रिपुरा 31.08 % मिजोरम 94.04 % मणिपुर 35.01 % नगालैंड 86.05 % असम 12.04 % अरूणाचल 68.08 % उत्तर प्रदेश 0.07 %

 

विश्व आदिवासी दिवस : पूरी दुनिया में है आदिवासियों की धूम, भारत में कितनी है आबादी ?

राम मंदिर भूमि पूजन पर भड़के सपा सांसद, कहा- 'हमारे साथ बहुत बड़ी नाइंसाफी हुई है...'

'खतरों के खिलाड़ी' के सेट पर जय भानुशाली हुए घायल, वीडियो साझा कर बोली यह बात

Related News