बदल जायेगी इस प्रशिक्षण से ट्रक ड्राइवरों की जिंदगी

हमारी जो भी जरूरतें होती हैं वो तब पूरी हो पाती हैं जब बड़े-बड़े ट्रक देश के न जाने कौन-कौन से रास्ते से होते हुए हमारी जरूरत की चीजों को हम तक पहुंचाते हैं। इसके बाद भी सबसे ज्यादा मुश्किल में रहते हैं ये ट्रक वाले। क्योकि ज्यादातर सड़क हादसे ट्रक से ही होती हैं। लेकिन अब देश में बदलाव हो  रहा है और ये बदलाव ट्रक वालों में भी आप धीरे-धीरे महसूस करेगें। 

ट्रक ड्राइवर ट्रेनिंग सेशन के दौरान टाटा मोटर्स ने अपने ट्रक ड्राइवरों एक अलग पहचान की शुरुआत की। उसमें से बढ़िया ट्रक चलाने वाले कुछ ड्राइवरों का का चुनाव किया हैं तथा और ट्रक रेसिंग में हिस्सा लेने के लिए ट्रैक ट्रेनिंग दी गई है। इसके बाद पहली बार भारत में बुद्व इंटरनेशनल सर्किट पर ट्रक रेसिंग का आयोजन 2014 में किया गया। इस रेसिंग से कई ट्रक ड्राइवरों की जिंदगी बदल दी। जिन ट्रक ड्राइवरों ने ढाबे के अलावा कहीं खाना नहीं खाया आज वो प्लेन में चल रहे हैं और फाइव स्टार होटल में टाटा के प्रशिक्षकों के साथ चेन्नई में ट्रेनिंग ले रहे हैं। टाटा मोटर्स ने चौथे चरण के टी1 रेसर कार्यक्रम लांच किया गया। 

चैंपियनशिप 2016 के दौरान जगत सिंह और नागार्जुन ने अपने बेहतरीन प्रदर्शन से लोगों का दिल जीत लिया। अमर उजाला से बात करते हुए नागार्जुन कहते हैं कि,"पहले मुझे समाज महज एक ट्रक ड्राइवर के रूप में देखता था लेकिन अब मुझे हर कोई रेसर कहता है। भारत में शुरू जहां से ट्रक ड्राइवर  सेफ ड्राइविंग ट्रेनिंग ले रहे हैं यहां उनको एक मकसद मिला है यहां अच्छा प्रदर्शन करने के बाद रेसर बनने का सपना पूरा कर सकते हैं।" 

टीआरपी प्रशिक्षण के दौरान अलग डिज़ाइन किया गया है, क्योंकि इसमें इन ड्राइवरों को रेसिंग के लिए प्रशिक्षण दिया जाता हैं जिनके पास ट्रैक ड्राइविंग का कोई अनुभव नहीं रहा है। इस पाठ्यक्रम की सामग्री को ड्राइवरों के अनुकूल बनाई गई है, ताकि इसे ड्राइवर समझ सकें।

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