इस एक मंत्र को बोलकर सूर्य भगवान को चढ़ाए मीठा जल, मिलेगा मान-सम्मान

आप सभ को बता दें कि ज्योतिष में सूर्यदेव को सभी ग्रहों का राजा कहते है और इसके कारण सूर्य की पूजा से कुंडली के सभी ग्रह दोष दूर हो सकते हैं. कहते हैं सूर्य को मनाने के लिए रोज सुबह सूर्य को अर्घ्य अर्पित करना चाहिए. कहते हैं जो लोग रोज यह करते हैं वह घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान प्राप्त करते हैं. इसी के साथ आज हम आपको बताने जा रहे हैं सूर्य को जल चढ़ाने की विधि और सूर्य के सरल मंत्र.

पूजन विधि - इसके लिए सुबह सूर्योदय से पहले उठें। स्नान करें। नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल भी डालें। साफ वस्त्र धारण करें। अब इसके बाद सूर्यदेव के सामने आसन बिछाएं और आसन पर खड़े होकर तांबे के बर्तन में पवित्र जल भरें। अब उस जल में थोड़ी सी मिश्री भी मिलाएं। ऐसी मान्यता है कि सूर्य को मीठा जल चढ़ाने से जन्मकुंडली के मंगल दोष दूर होते हैं और जब सूर्य से नारंगी किरणें निकली रही हों यानी सूर्योदय के समय दोनों हाथों से तांबे के लोटे से जल ऐसे चढ़ाएं कि सूर्य जल की धारा में दिखाई दे. इसी के साथ जल चढ़ाते समय सूर्य मंत्र भी बोलना चाहिए.

सूर्य अर्घ्य मंत्र - ऊँ ऐही सूर्यदेव सहस्त्रांशो तेजो राशि जगत्पते। अनुकम्पय मां भक्त्या गृहणार्ध्य दिवाकर:।। ॐ सूर्याय नम:, ॐ आदित्याय नम:, ॐ नमो भास्कराय नम:। अर्घ्य समर्पयामि।।

सूर्य ध्यान मंत्र- 

ध्येय सदा सविष्तृ मंडल मध्यवर्ती। नारायण: सर सिंजासन सन्नि: विष्ठ:।। केयूरवान्मकर कुण्डलवान किरीटी। हारी हिरण्यमय वपुधृत शंख चक्र।। जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महाधुतिम। तमोहरि सर्वपापध्‍नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम।। सूर्यस्य पश्य श्रेमाणं योन तन्द्रयते।

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