सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं सोनिया और प्रियंका गांधी, गांधी परिवार के इनकम टैक्स आंकलन से जुड़ा है मामला, HC से याचिका ख़ारिज

नई दिल्ली: आयकर निर्धारण (Income Tax Assessment) को केंद्रीय सर्किल में ट्रांसफर किए जाने को लेकर मामला अब सर्वोच्च न्यायालय  पहुंच चुका है। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत में यह याचिका दाखिल की है। सोनिया और प्रियंका गांधी ने शीर्ष अदालत में टैक्स निर्धारण के लिए केंद्रीय सर्किल में ट्रांसफर करने के आयकर विभाग के फैसले को सही ठहराने को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगाने की मांग की है। 

बता दें कि, इससे पहले 26 मई को दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने फेसलेस असेसमेंट मामले को केंद्रीय सर्किल में ट्रांसफर करने के फैसले को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं खारिज कर दी थी। उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति डीके शर्मा और न्यायमूर्ति मनमोहन की बेंच ने अपने फैसले में कहा था कि आयकर विभाग की तरफ से केंद्रीय सर्किल में ट्रांसफर करने का फैसला पूरी तरह कानून के मुताबिक लिया गया है। उच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई के दौरान अपना फैसला 15 मार्च को सुरक्षित रखा था और 26 मई को फैसला सुनाया था।

किस बात पर रोक लगवाने सुप्रीम कोर्ट पहुंची हैं प्रियंका गांधी ?

बता दें कि, आयकर विभाग ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी, यंग इंडियन, संजय गांधी मेमोरियल ट्रस्ट, राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट, राजीव गांधी फाउंडेशन और जवाहर भवन ट्रस्ट की जांच में तलाशी और बरामदगी के बाद गांधी परिवार के इनकम टैक्स आकलन को केंद्रीय सर्किल में ट्रांसफर करने का फैसला किया था। मगर, गांधी परिवार की तरफ से इस फैसले को मनमानापूर्ण बताया गया और इसके खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी, लेकिन हाई कोर्ट ने आयकर विभाग के फैसले को सही ठहराया। अब इसी के खिलाफ सोनिया और प्रियंका गांधी सुप्रीम कोर्ट पहुंची हैं, जहां उन्होंने उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगाने की मांग की है। ताकि, गांधी परिवार का इनकम टैक्स आंकलन केंद्रीय सर्किल में न जाए।  

क्या है मामला :-

बता दें, 2018-19 का ये मामला आर्म्स डीलर संजय भंडारी (Arms Dealer Sanjay Bhandari) से संबंधित है, जिसे कथित तौर पर प्रियंका गाँधी के पति रॉबर्ट वाड्रा का बेहद खास बताया जाता है। हालाँकि, रॉबर्ट वाड्रा लगातार संजय भंडारी से अपने रिश्तों को नकारते रहे हैं। बता दें कि, संजय भंडारी पर देश के रक्षा सौदों में बिचौलिया बनकर हेरफेर करने का आरोप है और CBI-ED की तरफ से संजय भंडारी के खिलाफ भारत में मनी लान्ड्रिंग के आरोप भी तय किए जा चुके हैं। भंडारी को ब्रिटेन में अरेस्ट किया गया था, फ़िलहाल वो नज़रबंद है, जहाँ से उसे भारत लाने की कोशिशें की जा रही है, ताकि ये पता लगाया जा सके कि, उसने किसके साथ मिलकर या किसके संरक्षण में आकर रक्षा सौदों में हेरफेर की है।  

इसके साथ ही रॉबर्ट वाड्रा का कथित सहयोगी संजय भंडारी भारत में गोपनीयता उल्लंघन कानून में वांटेड है। उस पर काला धन सफेद करने और टैक्स चोरी के भी मामले दर्ज हैं, जिन आधार पर उसके प्रत्यर्पण की अपील की गई। फिलहाल वह ब्रिटिश कोर्ट से जमानत पर है। कांग्रेस सरकार के कुछ रक्षा सौदों में करोड़ाें की रिश्वत से संजय भंडारी के सम्बन्ध जानने के लिए उसका प्रत्यर्पण बेहद जरूरी है। इन सौदों के लिए उसके बैंक अकाउंट में करोड़ों रुपया भेजा गया था। भंडारी ने फ्रांसीसी कंपनी थेल्स पर 90 करोड़ का कमीशन न चुकाने का मुकदमा भी कर रखा है।

बता दें कि, भंडारी और रॉबर्ट वाड्रा दोनों टैक्स चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों का सामना कर रहे हैं। रॉबर्ट वाड्रा 2014 में NDA सरकार के सत्ता में आने के बाद से गुड़गांव और राजस्थान में कुछ अन्य मामलों में जमीन के सौदों के लिए जांच का सामना कर रहे हैं। बाद में वाड्रा का नाम लंदन और दुबई में संपत्तियों की खरीद के लिए संजय भंडारी के खिलाफ जारी जांच के दौरान सामने आया था। ED के अनुसार, भंडारी के कंट्रोल वाली संस्थाओं ने संपत्तियां खरीदीं। इन्हें,बाद में कथित तौर पर वाड्रा से संबंधित संस्थाओं को ट्रांसफर कर दिया गया। इसी मामले की गहन जांच और मामले की तह तक पहुँचने के लिए सभी मामलों को सेंट्रल सर्किल में ट्रांसफर किया गया है, जिसके खिलाफ सोनिया गाँधी और प्रियंका गांधी सुप्रीम कोर्ट पहुंची हुईं हैं, उनका कहना है कि, संजय भंडारी से हमारा कोई लेना-देना नहीं। हालाँकि, भंडारी पर कांग्रेस सरकार के दौरान ही देश के रक्षा सौदों में बिचौलिया बनकर कमीशन खाने का अरोप है, इसलिए आयकर सबको साथ जोड़कर जांच करना चाहता है। 

हालाँकि,  दिल्ली उच्च न्यायालय ने आयकर प्राधिकरण के टैक्स ट्रांसफरिंग असेसमेंट रिपोर्ट को यथावत रखा है। यानी अब प्राधिकरण दस्तावेजों की और गहन जांच करेगा, ताकि मामले की तह तक पहुंचा जा सके। सेंट्रल सर्किल में हुए ट्रांजैक्शन यानी लेनदेन के वास्तविक आदमी को सामने लाया जा सके। अब देखना ये है कि, क्या सुप्रीम कोर्ट से सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी को राहत मिलती है या नहीं ?

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