सात वर्षीय जैनब के गुनहगार को सज़ा-ए-मौत

लाहौर: किसी बेबस की चीख महज एक कुचली हुई दर्द की आवाज नहीं होती वो बद्दुआ होती है उस दर्द देने वाले के लिए जो इंसानियत को भुला कर हैवानियत का गुलाम हो उस दर्द की नुमाईंदगी करता है. सच्चे मन से दी गई दुआ और दर्द भरी आवाज की कराह से दी गई बद्दुआ कभी ख़ाली नहीं जाती. सात वर्षीय जैनब के रेप और हत्‍या मामले में दोषी इमरान अली नक्‍शबंदी को पाकिस्तान की आतंक रोधी कोर्ट (एटीसी) ने आज मौत की सजा सुना दी. एटीसी कोर्ट के जज सज्जाद अहमद ने इमरान को चार अपराध नाबालिग लड़की का किडनैप, रेप, अप्राकृति संबंध और बाद मे हत्या का दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई है.

पंजाब प्रॉसीक्‍यूटर जनरल कादिर ने मीडिया को बताया, कोर्ट ने इमरान को अपहरण, रेप, हत्‍या के लिए धारा 7 के तहत सजा सुनाई है, इसके साथ ही नाबालिग के साथ अप्राकृतिक कृत्‍य के एवज में उसे आजीवन कैद के साथ एक मिलियन रुपये का जुर्माना देना होगा. जैनब के अंकल और भाई समेत कुल 56 प्रत्‍यक्षदर्शी ने इमरान के खिलाफ गवाही दी ,फॉरेंसिक रिपोर्ट और पॉलिग्राफ टेस्‍ट ने यह साबित कर दिया कि इमरान ने जैनब की हत्‍या की.

अली जैनब को लेकर एक निर्माणाधीन बिल्डिंग में गया और वहां उसने उसके साथ रेप के बाद उसकी हत्या कर दी, पांच दिन बाद उसका शव मिला, घटना के बाद लोग सड़क पर उतर आए थे और तत्काल दोषियों को गिरफ्तार करने की मांग कर रहे थे, 23 जनवरी को अधिकारियों ने सीरियल किलर इमरान को पकड़ लिया था.

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