रवि पुष्य संयोग - इस संयोग में इन वस्तुओं के दान से मनोकामना होती है पूरी

शास्त्रों में पुष्य-नक्षत्र को सभी नक्षत्रों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है. यह नक्षत्रों  की श्रेणी में आठवां नक्षत्र होता है जो सभी नक्षत्रों में उत्कृष्ट स्थान रखता है. इस बार 20 मई  को रवि पुष्य संयोग नक्षत्र पड़ रहा है. वैसे तो रविवार स्वयं ही सूर्यदेवता का दिन माना जाता है और इस दिन पुष्य नक्षत्र होने से रवि-पुष्य का शुभ महासंयोग बन रहा है. इस दिन आपकी सभी प्रकार की समस्याओं के निदान पाने के लिए आप कुछ उपाय कर सकते हैं.

1. रविवार को प्रातः जल्दी उठकर रवि-पुष्य के शुभ योग में स्नान आदि करके तत्पश्चात सूर्य को तांबे के लोटे से अर्घ्य देना चाहिए. सर्वप्रथम लोटे के जल में कुंकुम तथा लाल रंग के फूल मिलाकर अर्घ्य देना शुभदायक होता है. 

2. आपकी धन सम्बन्धी परेशानियों के समाधान के लिए रवि-पुष्य नक्षत्र में कमलगट्टे की माला पर महालक्ष्मी मंत्र - "ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:" का 108 बार जाप करने से माँ लक्ष्मी प्रसन्न होती है और धन-लाभ का वरदान देती है.

3. रवि-पुष्य के इस शुभ महासंयोग में दक्षिणावर्ती शंख में लेकर उसमे जल भरकर माता लक्ष्मी को चढ़ाने और उनके पास रखने से देवी अन्नपूर्णा प्रसन्न होती हैं तथा शुभ-फल देती है.

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