तो क्या बंद हो जायेंगे रेलवे के लाल-हरे सिग्नल?

नई दिल्ली : देश भर में रेल हादसों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. इसकी रोकथाम के लिए अब सरकार मौजूदा सिग्नल सिस्टम को पूरी तरह बदलने पर विचार कर रही है. अभी तक चालकों के लिए लाल और हरी लाइट को सिग्नल के रूप में शुरुआत से ही चलाया जा रहा है जिसे अब सरकार बंद करने की फिराक में है. इसकी घोषणा इस बजट में हो सकती है.

देश में रेल नेटवर्क बहुत विशाल है और इतने बड़े नेटवर्क से सिग्नल व्यवस्था को बदला जाना भी बहुत खर्चीला होगा. इस सिस्टम को बदलने में लगभग 60,000 करोड़ रुपये से भी अधिक खर्च होने का अनुमान लगाया गया है. अभी तक देश में सिग्नल सिस्टम पर अलस्टॉम, एनल्सडो, सीमंस, बोम्बार्डियर और थेल्स सहित यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (ईटीसीएस) की प्रमुख कंपनियां कार्यरत हैं.

रेल मंत्री पीयूष गोयल का कहना है कि - "हम मौजूदा सिग्नल प्रणाली को पूरी तरह बदलने की योजना बना रहे हैं. इतिहास में रेलवे पहली बार ऐसा करने जा रही है." इस सम्बन्ध में सूत्रों से पता चला है कि, इस बदलाव के लिए बहुत पैसा खर्च होगा वहीँ इस पर मंत्री का मानना है कि यदि इतने बड़े पैमाने पर आर्डर दिया जाता है तो वह देश के लिए सस्ता साबित होगा. इसके लिए एन्युटी मॉडल अपनाया जा सकता है. एन्युटी मॉडल में जो कम्पनिया इसके लिए कार्य करेगी उन्हें टुकड़ों में भुगतान किया जाएगा. अब इस योजना को आर्थिक मामलो कि समिति के सामने प्रस्तुत किया जाएगा.

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