एक राष्ट्र,एक चुनाव को पी चिदंबरम ने जुमला बताया

नई दिल्ली : राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बजट अभिभाषण में राज्य विधान सभाओं और लोकसभा के चुनाव एकसाथ कराने की वकालत की थी.इस बात पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे एक और जुमला बता दिया .चिदंबरम का मानना है कि यह वर्तमान संवैधानिक प्रावधान के अंतर्गत संभव ही नहीं है.

उल्लेखनीय है कि पी.चिदंबरम ने अपनी पुस्तक ‘स्पीकिंग ट्रूथ टू पावर’ के जारी होने के बाद परिचर्चा में कहा कि भारत  के संविधान में संशोधन नहीं किया जाता है तब तक कोई भी एक साथ चुनाव नहीं करा सकता.संसदीय लोकतंत्र में, विशेष तौर पर तब, जब 30 राज्य हों, वर्तमान संविधान में आप एक साथ चुनाव नहीं करा सकते. यह एक और चुनावी जुमला है. एक राष्ट्र, एक टैक्स भी एक जुमला था.

गौरतलब है कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने अभिभाषण में सरकार का पक्ष रखते हुए बार-बार चुनाव होने से मानव संसाधन पर पड़ने वाले बोझ का जिक्र किया था. आचार संहिता लागू होने से देश की विकास प्रक्रिया भी बाधित होने की भी बात करते हुए उन्होंने एकसाथ चुनाव कराने के विषय पर चर्चा और संवाद बढ़ाने तथा सभी राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाने पर जोर दिया था.

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