जानिए आखिर क्यों मनाया जाता है नाग पंचमी का पर्व?, पढ़े पौराणिक कथा

आप सभी जानते ही होंगे हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण मास के शु्क्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। जी हाँ और यह दिन नाग देवता की पूजा के लिए समर्पित होता है। ऐसी मान्यता है कि नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। आप सभी को बता दें कि पौराणिक काल से सर्प देवताओं की पूजन की परंपरा है और ऐसी मान्यता है कि नाग की पूजा करने से सांपों के कारण होने वाला किसी भी प्रकार का भय खत्म हो जाता है। वहीं ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नाग पंचमी के दिन नाग देवताओं की आराधना करने से जातकों को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। आप सभी को बता दें कि इस बार 2 अगस्त को नाग पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। ऐसे में हम आपको बताने जा रहे हैं नाग पंचमी पौराणिक कथा। 

नाग पंचमी पौराणिक कथा- पौराणिक कथा के अनुसार जनमेजय अर्जुन के पौत्र राजा परीक्षित के पुत्र थे। जब जनमेजय ने पिता की मृत्यु का कारण सर्पदंश जाना तो उसने बदला लेने के लिए सर्पसत्र नामक यज्ञ का आयोजन किया। नागों की रक्षा के लिए यज्ञ को ऋषि आस्तिक मुनि ने श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन रोक दिया और नागों की रक्षा की। इस कारण तक्षक नाग के बचने से नागों का वंश बच गया। आग के ताप से नाग को बचाने के लिए ऋषि ने उनपर कच्चा दूध डाल दिया था। तभी से नागपंचमी मनाई जाने लगी। वहीं नाग देवता को दूध चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई।

 

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कहा जाता है नाग पंचमी के दिन जिन नाग देवों का स्मरण कर पूजा की जाती है, उन नामों में अनंत, वासुकी, पद्म, महापद्म, तक्षक, कुलीर, कर्कट, शंख, कालिया और पिंगल प्रमुख हैं।

 

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