2019 चुनाव-कुर्सी मोह : ममता बनर्जी 'हिंदी शरणम गच्छामि'

Sep 08 2018 11:23 AM

कोलकाता : 2019 चुनावों में थोड़ा समय ही बाकी है. ऐसे में सारी पार्टियां अपनी कमर कस चुकी है.  2019 चुनावों में कई पार्टियां गठबंधन बनाकर सामने आ रही है तो कई पार्टियां अकेले ही अपनी रोटी सेकने में लगी हुई है. पहले खबर थी कि गठबंधन में कांग्रेस, बसपा, सपा और आरजेडी के साथ साथ ममता की पार्टी तृणमूल कांग्रेस भी साथ होगी. लेकिन कई मौक़े आए जब तृणमूल कोंग्रस को कांग्रेस से अलग थलग पाया गया.

तृणमूल कोंग्रस की ममता बनर्जी की मंशाएं किसी से भी छिपी नहीं है. मौजूदा समय में ममता पश्चिम बंगाल की सीएम है और उन्हें कई बार राहिल गाँधी के सामने खड़े होता पाया गया है उन्होंने कई बार कई मौकों पर राहुल का विरोध किया है. अब 2019 के लिए ममता ने अपना अगला कदम बढ़ा दिया है. इसके लिए ममता ने  बंगाल में अपनी पार्टी तृणमूल कांग्रेस की अब हिंदी विंग की स्थापना की है. 

हिंदी विंग की स्थापना के मौक़े पर उन्होंने बड़ी ही लच्छेदार बाते फेंकी है. उन्होंने कहा वह हिंदी बोलने वाली आबादी से एक विशेष लगाव महसूस करती हैं. यहां उन्होंने अपील करते हुए कहा, प्लीज आप मुझे अपनी बेटी की तरह ही समझें. साथ ही इस मौक़े पर उन्होंने राज्य में एक हिंदी यूनिवर्सिटी खोलने का एलान भी कर दिया. 

इसके पीछे ममता की राजनितिक सोच भी जानिए. - हालिया समय में बंगाल में गैर बांग्लाभाषी लगभग 20 फीसदी लोग रहते है. साथ ही इस आबादी का एक बड़ा हिस्सा बीजेपी समर्थक है जो कई सीटों पर ममता का खेल बिगाड़ सकता है और इसी खेल में अपनी मौजूदगी बनाए रखने के लिए ममता ने यह दांव खेला है.  - बता दें कि देश में उप्र और महाराष्ट्र के बाद सबसे ज्यादा लोकसभा सीटें पश्चिम बंगाल में ही आती है. - अभी बंगाल में लोकसभा कि कुल सीटें 42 है. इसमें से 34 सीटें टीएमसी के पास हैं. चार पर कांग्रेस जमी हुई है. वहीं बीजेपी के हिस्से में 2 सीटें है.

ज्ञात हो कि ममता असम में नेशनल रजिस्टर आॅफ सिटीजन्स (एनआरसी) लागू करने को लेकर कड़े रुख दिखा चुकी हैं. गौरतलब है कि असम के बाद पश्चिम बंगाल में एनआरसी लागू करने को लेकर तो ममता ने सरकार को गृहयुद्ध तक की धमकी डे डाली है. 

गौरतलब है कि ममता ने अभी तक खुलकर कोई घोषणा नहीं की है. वह ना तो महागठबंधन के साथ जा रही है ना ही चुनावों में अकेले जानें की घोषणा कर रही है. लेकिन समय समय पर वह कई पार्टियों के नेताओं से मिलती रहती है. उनका रुख किस तरफ जाता है यह तो चुनाव, परिस्थितियां और आने वाला वक्त ही बताएगा. 

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