इंदौर की रंगपंचमी की गेर में भक्ति के साथ बिखरेंगे सामाजिक समरसता के रंग....

अरे जनाब अगर अभी भी आपके सिर से होली की खुमारी नहीं उतरी है तो एक मौका और है, रंगों के इस त्योहार में शरीक होने का। इंदौर की रंगपंचमी को अगर रंगों का महाकुंभ कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। जी हां, इंदौर में हर साल होली के पांचवें दिन यानी रंगपंचमी के मौके पर पूरा इंदौर और आसपास के जिलों से लोग शामिल होते हैं। लगभग पूरे मालवा प्रदेश में रंगपंचमी पर जलूस निकालने की परंपरा है जिसे 'गेर' या फाग यात्रा कहते हैं। इस बार रंगीन फुहारों का यह मजमा बना है 17 मार्च शुक्रवार को।

खास बात यह है कि गेर के लिए किसी को औपचारिक बुलावा नहीं दिया जाता। फिर भी लाखों की संख्या में लोग इस रिवायती फुहार में भींगने के लिए उमड़ पड़ते हैं। पहले जब होली का पर्व कई दिनों तक मनाया जाता था तब रंगपंचमी होली का अंतिम दिन होता था और उसके बाद कोई रंग नहीं खेलता था। मथुरा और बरसाने की होली से ज्यादा होली का माहौल इंदौर में रंगपंचमी के दिन रहता है। रंग ही उनके लिए पूजा-आराधना है और रंग ही जीवन जीने की कला।

इस मौके पर इंदौर में लोग गले मिलते हैं, एक दूसरे को बधाइयां देते हैं, बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं और इस रंगोत्सव को सलिब्रेट करते हैं। रंगों को खुशबूदार बनाने के लिए टेसू के फूलों का इस्तेमाल भी होता है। मुफ्त में भांग और ठंडाई का वितरण भी प्रचलन में है। पूरे लवाजमे के साथ सुबह 9 बजे से सभी गेर राजबाड़ा पर एकत्र होने लगेगी। 200 फीट तक मिसाइलें रंग-गुलाल का गुबार बनाएगी। पूरा शहर इस परंपरा में अपनी भागीदारी निभाएगा। तो आप भी भिया इंदौर की रंगबिरंगी रँगीली रंगपंचमी का आनंद उठाइये। टोरी कार्नर, हिन्द रक्षक, मारल क्लब, संस्था सर्जन, रसिया कार्नर, रासरंग फ़ाग यात्रा, आदि संस्थाओ की शाही गेर निकलेगी।   

 

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