आतंकियों के मारे जाने का मुझे दुःख है !

श्रीनगर के एसएसपी डॉ. शैलेन्द्र मिश्रा का एक बयान इन दिनों बवाल मचा रहा है. 2009 कि बैच के इस आईपीएस अधिकारी ने एक ब्राह्मण सभा के समारोह के दौरान अपने 15  मिनट के भाषण में कहाँ कि आतंकवादियों को मारने के बाद जश्न ना मनाया जाये ,ये हमारी सामूहिक विफलता का नतीजा है.  कश्मीर में सेना मिशन ऑल आउट के तहत साल में अब तक 200 से ज्यादा आतंकवादियों को मारा गया है. आतंकवादियों मौत के घाट उतारने के काम को अंजाम देने में जुटी सेना कि कार्यवाही के बीच, आईपीएस अधिकारी का ये बयान काफी तुल पकड़ रहा है.

अपने भाषण में श्री मिश्रा ने कहाँ कि में भाषण देने नहीं आया हु, पर इतना जरूर कहूंगा कि आतंकवादी भी समाज से निकले लोग ही है. उन्हें मारने के बजाय उन कारणों पर काम किया जाना जरुरी है, जिनके चलते ये लोग आतंकी बने. ये मेरी निजी राय है. समाज के कुछ बच्चे सिस्टम से इतने नाराज़ है कि उन्होंने गुनाह कि राह चुनी है. बस उनकी सोच बदलने का काम किया जाना बाकि है.

उन्होंने इजिप्ट की एक घटना को सुनाते हुए कहाँ, जब एक 17 साल का लड़का खुद पर बम लगा कर 300  लोगों कि जान लेने का कदम उठाता है, तो सवाल यही होता है की आखिर इतना आक्रोश उसमे क्यों और कहाँ से आया.  

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