विविधता भरे समाज में सभी को स्वीकार किए जाने की जरूरत

नई दिल्ली : भारत के उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने देश की विविधता के लिए असहिष्णुता को एक बड़ी चिंता बताया है। उन्होंने कहा है कि समानता, न्याय और सशक्तीकरण के साथ सामाजिकतौर पर सहमति बनाने की जरूरत है। यही नहीं उन्होंने कहा कि मानवाधिकारों के लिए सम्मान के साथ ही विविधता की जरूरत है। देश में समानता, न्याय और अधिकारों के लिए सामाजिक सहमति की बहुत जरूरत है। इस तरह की सहमति और विविधता के लिए असहमति के प्रति असहिष्णुता की उभरती प्रवृत्ति चिंता का कारण है।

पुणे इंटरनेशनल सेंटर में सोश्यल इनेवेशन एंड सोश्यल हार्मोनी विषय पर वे उपस्थितों को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि दैनिक व्यवहार में सहिष्णुता को स्वीकार किया जाना जरूरी है। यह समाज को समानता की ओर ले जाता है। हमारे समाज में विविधता है मगर लोगों के लिए ग्रहणशीलता होने की जरूरत भी है।

उनका कहना था कि यदि ऐसा नहीं होगा तो लोकतंत्र का स्वरूप कुछ अलग हो जाएगा। भारतीय संविधान में अल्पसंख्यकों की रक्षा की बात कही गई है सामाजिक नवाचार सौहार्द, स्थिरता और समाज में सुरक्षा के स्तर को जोड़ने की बात भी कही गई है। आखिर समाज में समानता, सशक्तीकरण और न्याय की जरूरत है और ये लोकतंत्र का आधार भी हैं। 

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