पुलिसकर्मियों ने प्रमोशन के लिए किया था फर्जी एनकाउंटर

गाजियाबाद : वर्ष 1996 में मोदीनगर के भोजपुर में फर्जी एनकाउंटर में चार लोगों की हत्या के आरोप में विशेष सीबीआई कोर्ट ने तत्कालीन थानाध्यक्ष भोजपुर समेत चार पुलिसकर्मियों को दोषी करार दिया है.कोर्ट ने सजा का फैसला अभी सुरक्षित रखा है. 22 फरवरी को बहस के बाद कोर्ट फैसला सुनाएगी.पुलिसकर्मियों ने यह फर्जी एनकाउंटर आउट ऑफ टर्न प्रमोशन पाने के लिए किया था.

आपको बता दें कि यह मामला 8 नवंबर 1996 का है. भोजपुर पुलिस ने फर्जी मुठभेड़ में मोदीनगर-हापुड़ मार्ग की पुलिया पर में मोदीनगर के विजयनगर निवासी जसबीर, जलालुद्दीन, अशोक व प्रवेश को मार गिराया था. पुलिस ने चारों के शवों को अज्ञात में दिखाकर पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार करा दिया था.मृतकों के परिजनों ने मुठभेड़ को फर्जी करार देते हुए हंगामा किया था. कई दिन चले विरोध प्रदर्शन के बाद मामले की जांच 7 अप्रैल 1997 को दिल्ली सीबीआई की स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम की जांच में सामने आया कि पुलिस ने मुठभेड़ में मरने वाले चार लोगों को थाने के बाहर चाय के खोखे से उठाया था.बाद में हापुड़ मोदीनगर मार्ग स्थित पुलिया व खेत में ले जाकर मुठभेड़ दिखाकर हत्या कर दी.सीबीआई ने तत्कालीन भोजपुर थानाध्यक्ष लाल सिह, उपनिरीक्षक जोगेंद्र, कांस्टेबल सूर्यभान, सुभाष चंद व रणवीर को आरोपी बनाते हुए रिपोर्ट दर्ज की थी.

सीबीआई कोर्ट के विशेष जज राजेश चौधरी ने सोमवार को चार आरोपियों लाल सिह, जोगेंद्र, सूर्यभान व सुभाष को दोषी करार दिया है जबकि रणवीर की सुनवाई के दौरान पहले ही मृत्यु हो चुकी है.फोरेंसिक रिपोर्ट से पता चला था कि जसबीर को लगी एक गोली मोदीनगर की तत्कालीन एएसपी ज्योति वैलूर की सर्विस रिवाल्वर से चली थी.इस मामले में कोर्ट ने ज्योति वैलूर को आठ नवंबर 2007 में तलब किया था, लेकिन वह कोर्ट में पेश नहीं हुईं.

जांच में सीबीआई को पता चला है कि आईपीएस ज्योति वैलूर इस समय इंग्लैंड में रह रही हैं और वह वर्ष 2012 में के पद से इस्तीफा दे चुकी हैं.कोर्ट से उनके खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी हो चुके हैं.सीबीआई उन्हें वापस लाने के प्रयास में जुटी है.

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