क्या आप जानते है पितरों के भोजन में खीर-पूड़ी ही क्यों बनाई जाती है? यहाँ जानिए वजह

पितृ पक्ष का आरंभ 29 सितंबर 2023 से हो चूका है. श्राद्ध-कर्म में तर्पण को सबसे अहम अंग माना गया है। तत्पश्चात, श्रद्धानुसार भोजन बनाकर कराना दूसरा अहम अंग है। तीसरा अंग है त्याग। वही श्राद्ध का भोजन बहुत ही साधारण तथा शुद्ध होना चाहिए. श्राद्ध के खाने में खीर-पूड़ी जरुर बनाएं. खीर को पायस अन्न कहते हैं, पायस यानी प्रथम भोग. दूध तथा चावल से बनी खीर शरीर को ऊर्जा देती है. यही कारण है कि पितृ पक्ष पितरों को खीर, पूड़ी का धूप देते हैं तथा पितरों के नाम ब्राह्मण भोज कराते हैं.

* श्राद्ध का खाना बनाते वक़्त जौ, मटर और सरसों का इस्तेमाल करना श्रेष्ठ माना जाता है. पितरों की भोग की थाल में कद्दू की खट्‌टी-मिठी सब्जी अवश्य सम्मिलित की जाती है. * पितरों के भोजन में तिल का अवश्य इस्तेमाल करें. तिल पिशाचों से श्राद्ध की रक्षा करते हैं. तिल को बहुत शुभ और पवित्र माना जाता है. प्रसाद में अधिक से अधिक तिल होने पर उसका अक्षय फल प्राप्त होता है. * पितृ पक्ष में चना, मसूर, उड़द दाल, प्याज, लहसून, मूली से युक्त भोजन नहीं बनाना चाहिए. इसे अशुभ माना गया है. * श्राद्ध के भोजन से सबसे पहले अग्नि में धूप दें, फिर पंचबलि ग्रास निकालें. ब्राह्मणों को भोजन कराएं. यदि ब्राह्मण न मिलें तो बहन, दामाद या भानजे को भी भोजन कराना बहुत लाभदायक होता है.

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