मुफ्त दवा का दाम चुकाते है गरीब

मध्यप्रदेश : प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में जहाँ मरीजों को मुफ्त दवा मुहैया करवाने के दावे किये जा रहे है,वही असलियत इससे कोसो दूर है. मुफ्त दवाइयाँ तो छोड़ो इलाज के लिए भी डॉक्टर सरकारी अस्पतालों में फीस वसूलने से नहीं चूक रहे. ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित अधिकांश स्वास्थ केन्द्रो में दवाई के बदले दाम वसूलने की खबरे है. 

राज्य सरकार हमेशा से दावा करती रही है, की स्वास्थ केन्द्रो से जुडी सभी योजनाये, गर्भवती महिलाओं की देख-रेख, बच्चो के कुपोषण संबंधी आकड़े, या मुफ्त सरकारी सुविधा मुहैया करवाने का काम पुरे प्रदेश में सुचारु रूप से चल रहा है. मगर वास्तविकता के धरातल पर मुफ्त की दवाइयों के बदले भी ड्यूटी डॉक्टर और अन्य स्टाफ ग्रामीण और शहरी लोगो से पैसे लेने से नहीं चुक रहे.

  तंग हाल और गरीब लोगो को स्वास्थ सुविधाएं देने के लक्ष्य से मुफ्त दवाई देने की योजनाओ के बनते ही सरकार ने खूब वाहवाही लूटी और खुद की पीठ भी थपथपाली, मगर जब वही गरीब लोग उन सुविधाओं को भोगने सरकारी अस्पताल गए तो उन्हें दाम चुकाने पड़े. अक्सर गरीब और पिछड़े लोग ही सरकारी अस्पतालों की और रुख करते है, इस उम्मीद से की उचित इलाज होगा. साथ-साथ आर्थिक रूप से भी बीमारी के कारण होने वाली परेशानियों से बच पाएंगे. ऐसे में जब मरीज को सामने पड़ा देख बात पैसो की आती है, तो परिजनों के सामने चुप-चाप दाम देने के आलावा दूसरा चारा ही नहीं बचता.  

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