अब की बार, खाट से बात!

क्या आप पीके शब्द को जानते हैं। पीके! ज़रा दिमाग के घोड़े दौड़ाईये और अपना जवाब खुद पाईये। जी हां, पीके। अरे वही जो इतना पी लिए थे कि हर आम चुनाव के बाद हर कहीं नमो - नमो होने लगा। अरे हम न तो किसी फिल्म की बात कर रहे हैं और न ही पीकर बहकने वाले की बात कर रहे हैं। हम तो बात कर रहे हैं चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की। जी हां, भारतीय जनता पार्टी के साथ लोकसभा चुनाव वर्ष 2014 में चुनावी प्रचार अभियान में जुड़ने के बाद नरेंद्र मोदी को रातों रात भाजपा को चुनावी ब्रांड बनाने वाले प्रशांत किशोर ने बिहार में नीतीश बाबू का प्रचार किया तो फिर बिहार में नीतीशे कुमार की बहार आ गई।

अब लगता है प्रशांत किशोर के माध्यम से अशांत कांग्रेस खेमे को नई संजीवनी मिल रही है। जो कांग्रेस अब तक चुनावी प्रचार अभियान में लोगों की निरसता का सामना करती थी जिस कांग्रेस को कई स्तर के चुनावों में हार का मुंह देखना पड़ता था और जिसके उपाध्यक्ष राहुल गांधी के बोलते ही लोग हंस पड़़ते थे आज उसके अभियान में उत्तरप्रदेश के किसान, मजदूर और अन्य वर्गों के लोग पहुंचे।

कांग्रेस इस बार कुछ सफल रही हालांकि यह समय ही बता पाएगा कि कांग्रेस वोट बटोरने में कितनी सफल रही है लेकिन खाट पर बात करने से राहुल गांधी ने अपनी पार्टी के लिए भीड़ जुटा ली है ऐसी भीड़ जो राहुल को सुनने के साथ देशी अंदाज़ में तैयार खाट का मजा लूटने आएगी। खाट को लोग अपने साथ ले जा रहे हैं। ऐसे में गांवों के चैपालों पर घरों में और हर कहीं राहुल की खाट की चर्चा होगी फिर चारपाई पर बैठकर ग्रामीण कांग्रेस की बात भी कर पाऐंगे।

खाट घर में दिखती रहेगी तो आम आदमी के साथ कांग्रेस का हाथ भी लोगों को नज़र आता रहेगा। राहुल भले ही मोदी की लोकप्रियता को एकदम कम न कर पाऐं लेकिन खाट की बांट से वे ग्रामीणों में कांग्रेस के लिए कुछ जगह जरूर बना लेंगे और फिर पीके का जादू चल निकलेगा। जो पार्टी हाशिए पर जा चुकी है उसे खाट से सहारा दिलाने का पीके का यह अंदाज़ सभी के बीच चर्चाओं में बन गया है ऐसे में कांग्रेस को लोगों की सहानुभूति जरूर मिलेगी।

'लव गडकरी'

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