छोटी उम्र में किया इतना बड़ा काम, पर्यावरण को बचाने के लिए घूम लिए 8 देश

प्रदूषण से परेशान आकर एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग की तरह, मणिपुर की 8 वर्षीय लिसीप्रिया कंगुजम ने भी अपनी पीढ़ी के लिए स्वच्छ दुनिया की मांग को लेकर मुहिम शुरू की हुई है. लिसीप्रिया का मानना है कि वैश्विक नेताओं को उनके द्वारा कही गई बातों पर कार्य करने की जरुरत है. जून महीने में लिसीप्रिया ने संसद भवन के बाहर खड़े होकर भी प्रदर्शन किया था. उनकी मांग थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत में जलवायु परिवर्तन कानून लागू किया जाए 

मिली जानकारी के मुताबिक जागरूकता अभियान, रैलियों और प्राकृतिक आपदाओं के पीड़ितों की मदद करने के अलावा लिसीप्रिया ने भविष्य के लिए एक 'सर्वाइवल किट' भी तैयार किया है.आईआईटी जम्मू के छात्रों की मदद से इस किट को विकसित किया गया है. किट में एक ग्लास बॉक्स में एक पौधा होता है, जो स्वच्छ हवा प्रदान करने के लिए मास्क से जोड़ा जाना चाहिए.

जंहा लिसीप्रिया ने काफी अंतरराष्ट्रीय मंचो पर वैश्विक नेताओं के सामने पर्यावरण में बदलाव और प्राकृतिक आपदाओं को कम करने की मांग रखी है. कंगुजम ने पर्यावरण को बचाने की यह मुहिम सात साल की उम्र से शुरू की थी. वे यूएन मुख्यालय में भारत प्रतिनिधित्व करने वाली सबसे कम उम्र की भारतीय है.  मिली जानकारी लिसीप्रिया के प्रयासों को कई जगह मान्यता मिली है. जिसमें डॉ एपीजे अब्दुल कलाम चिल्ड्रन अवार्ड 2019, भारत शांति पुरस्कार 2019, और विश्व बाल शांति पुरस्कार शामिल हैं. साल 2019 में उन्होंने ग्रेटा थनबर्ग के साथ संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा युवा पर्यावरणविदों के लिए आयोजित बैठक में भी हिस्सा लिया था. 

ऐसा कहा जा लिसीप्रिया ने एक अखबार बताया कि आठ साल की उम्र वे 18 देशों का भ्रमण चुकी हैं, पर जागरूकता अभियान, सम्मेलनों और रैलियों का आयोजन करने के चलते उनकी स्कूली शिक्षा छूट गई है. कंगुजम ने बताया कि छुट्टियों में सब कार्यक्रमों का आयोजन करने के बाद भी पढ़ाई के लिए समय निकालना कठिन होता जा रहा है. 

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