Valentine’s Day 2017:''ऐसे बने पक्के 'मजनूँ'!''

Feb 14 2017 04:10 PM
Valentine’s Day 2017:''ऐसे बने पक्के 'मजनूँ'!''

''और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा, राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा''

फैज़ ने ये पंक्तियाँ एक अलग ही सन्दर्भ में लिखी थी। लेकिन आज की युवा पीढ़ी के लिए ये पंक्तियाँ सटीक और मजेदार है, क्योंकि आज की पीढ़ी के पास मोहब्बत के अलावा भी नौकरी, घर, कार, नये फॉर जी मोबाइल खरीदने की चिंताए हैं। इस वजह से एक ज़हनी और और देवदास किस्म के प्रेमियों की संख्या दिनों दिन घटती जा रही हैं। जो कि एक चिंता की वजह है। शायद, यही एक मात्रा कारण है कि आज के लड़कों के पास 'राँझा', 'मजनूँ' और 'रोमियो' बनने जैसा गॉड गिफ्टेड टैलेंट नहीं है। अब पार्ट टाइम किस्म के प्रेमियों की संख्या बढ़ती जा रही है, फुल टाइम प्रेमियों का अभाव है। वैसे ही जैसे, फुल टाइम जॉब की जगह पार्ट टाइम जॉब का क्रेज़ बढ़ रहा है। 

बहरहाल, आज हर प्रेमी शाहजहां जैसे ज़हनी भी नहीं है कि अपनी 'मुमताज़' के लिए ताजमहल बना सके। हाँ, इनके पास विराट कोहली बनने का सपना जरूर है। जो प्रेमिका को 'चॉकलेट डे' के दिन'सेंचुरी' गिफ्ट करना चाहते है। अब बात लड़कियों की, ये भी हीर, लैला, जूलियट जैसी प्रेमिका बनना डिजर्व नहीं करती (जख़्मी प्रेमियों के शब्दों में) है। हाँ, 'डीडीएलजे' की सिमरन बनने का सपना यह एक दिन हज़ारों बार देखती है। हालांकि ऐसा नहीं की 'देवदास' जैसे हार्डकोर प्रेमी इस दुनिया से विलुप्त हो गए हो गए हो।  

असल में अब हमारे ज़ीन से मोहब्बत गायब हो गई। अब हम टेक्नोलॉजी के ऐसे युग में रह रहे है, जहाँ इश्क़, महज़ एक नाम भर है। लड़कों को 'वस्ल की राहत से ज़्यादा राहत' अब इंस्टाग्राम, ट्विटर और फेसबुक पर जोक्स पढ़ने में आता है। अब वो प्रेमिका के प्यार में खून से सने ख़त लिखने का दौर नहीं है, अब तो फर्ज़ी फेसबुक आईडी से प्रेमिका को परेशान करने का दौर है। शायद इसी वजह से साइबर क्राइम की अवधारणा उपजी। 

कहा जाता है कि ग़ालिब को इश्क ने इस बेरहमी से मारा था कि मजबूरन उन्हें कहना पढ़ा था-''इश्क़ ने 'ग़ालिब' निकम्मा कर दिया/वर्ना हम भी आदमी थे काम के।'' आज युवाओं को व्हाट्सएप्प ने निकम्मा कर दिया। वो भी अव्वलदर्जे का निकम्मा। मतलब अब नए लोगों का कहना है, 'अपन तो मोहब्बत से दूर भिया!'  

फ़िलहाल, आपको 'हार्डकोर' मजनूँ बनने के कुछ टिप्स दे रहे है जिन पर गौर करें:

'ग़ालिब' को पढ़ें और पढ़ायें :
आज के युवाओं में इश्क़ का जूनून कम ही नज़र आता है। लेकिन कहा जाता है ना कि कोई काम मुश्किल नहीं होता है। ऐसे में 'मजनू', 'रोमियो' किस्म के अव्वलदर्जे के आशिक बनने के लिए ग़ालिब की शायरी पढ़ना बेहद जरूर है।  ग़ालिब यूँ तो उम्र भर उम्दा और बेहतर लिखते रहे हैं लेकिन उनके कुछ शेर आपको एक बिंदास आशिक़ बनने के लिए प्रेरित कर सकते है। तो चलिए चलते हैं ग़ालिब की दुनिया में, जहां दर्द है, उम्मीद है और एक ऐसा अटूट रिश्ता है, जो शायद आपको एक 'पक्का' मजनू' बना दें- 

1. तन्हा बैठना

2. या रब, न वह समझे हैं

3.दिल-ए-नादां

4.आह को चाहिए 

5. अंदाज़-ए-गुफ़्तगू क्या है

रोमांस किंग 'शाहरुख़' से भी सीखें :
शाहरुख़ खान को बॉलीवुड में रोमांस किंग के नाम से जाना जाता है। उनकी अलहदा डायलॉग डिलेवरी उन्हें सबसे अलग बनाती है। उनकी फिल्मों के कुछ फेमस डायलॉग है जो आपको 'देवदास' किस्म का 'प्रेमी' बनाने में तो मदद करेगी, साथ ही लड़कियां आपके प्यार में पागल, पागल हो जाएगी क्योंकि...दिल तो पागल है! गौर करें उनके संवादों पर-

1.'कि ...कि...कि ..!

2.कौन कमबख्त बर्दाश्त ...!

3....दिल से!

4.दिल से चाहो...!

5.प्यार दोस्ती है ...! 

 

3.थोड़ा बहुत 'कुमार' को भी पढ़ें'

प्रेम के कवि कुमार विश्वास अपनी प्रेम कविताओं से युवाओं में खूब अलख जगा रहे है। यदि आप एक गंभीर किस्म के आशिक़ बनने की माकूल योजना बना रहे हो तो उनकी ये चार शायरी जरूर रट लें, तभी आप कॉन्फिडेंस के साथ कह पाएंगे-''जो मेरा हो नही पाया, वो तेरा हो नही सकता !!'' 

समंदर पीर का अन्दर है, लेकिन रो नही सकता !
यह आँसू प्यार का मोती है, इसको खो नही सकता !!
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना, मगर सुन ले !
जो मेरा हो नही पाया, वो तेरा हो नही सकता !!

भ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हंगामा
हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा
अभी तक डूबकर सुनते थे सब किस्सा मुहब्बत का
मैं किस्से को हकीकत में बदल बैठा तो हंगामा

मोहब्बत एक अहसासों की पावन सी कहानी है !
कभी कबिरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है !!
यहाँ सब लोग कहते हैं, मेरी आंखों में आँसू हैं !
जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है !!

कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है,
मैं तुझसे दूर कैसा हुँ तू मुझसे दूर कैसी है
ये मेरा दिल समझता है या तेरा दिल समझता है !!!

 

5. फ़राज़ को भी न भूलें:
अहमद फ़राज़ एक मोहब्बत के शायर थे। उनकी शायर इश्क़ के ऐसे अल्हड मोड़ को पेश करती है कि आप एक बेहतरीन और नायब प्रेमी बन सकते है। उनके पांच शेर आपको एक उम्दा प्रेमी बनाने में पूरी-पूरी मदद करेंगे। 
 
अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें
जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं 
सो उसके शहर में कुछ दिन ठहर के देखते हैं

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं 
सो उसके शहर में कुछ दिन ठहर के देखते हैं

आँख से दूर न हो दिल से उतर जाएगा
वक़्त का क्या है गुज़रता है गुज़र जाएगा

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें
जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें

आखिर में 'पागल आदिलाबादी' के इस शेर के साथ अलविदा!

''पते की बात जो मुँह से निकल गई 'पागल'
तमाम शहर के पगले मिरी तलाश में हैं''

नोट:-यदि इन सब रूल्स को फॉलो करने के बाद भी आप प्यारे 'मजनूँ' नहीं बन पाए तो 'कृपया' आप को 'सोनम गुप्ता के बेवफा' 'रूल्स'  को फॉलो करने की जरुरत है। धन्यवाद!  

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