राष्ट्रपति ने कहा - राज करने के लिए बहुमत नहीं, सर्वमत चाहिए

Mar 18 2017 09:37 AM
राष्ट्रपति ने कहा - राज करने के लिए बहुमत नहीं, सर्वमत चाहिए

मुम्बई : राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने देश की सरकारों के बारे में कहा कि राज करने के लिए बहुमत नहीं बल्कि सर्वमत चाहिए. राष्ट्रपति ने यह विचार मुंबई विश्वविद्यालय में आयोजित एक आयोजन को संबोधित करते हुए व्यक्त किये.

इस आयोजन में देश की विशेषताओं का जिक्र कर राष्ट्रपति ने कहा कि भारत एक भौगोलिक सत्ता ही नहीं है,बल्कि एक विचार और संस्कृति है. विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षण संस्थानों इन विचारों के आदान-प्रदान का सर्वश्रेष्ठ जरिया हैं. इसलिए मुखर्जी ने इन शिक्षण संस्थानों में असहिष्णुता को कोई स्थान नहीं मिलने की गुजारिश की.

यही नही इस आयोजन में राष्ट्रपति ने वर्तमान पीएम मोदी और पूर्व पीएम की कार्यशैली का जिक्र कर उनकी प्रशंसा की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलग तरीके से काम करने का उल्लेख कर उनकी कड़ी मेहनत की सराहना की. वहीं राष्ट्रपति ने पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी का उल्लेख कर कहा कि वह अकेले ऐसे प्रधानमंत्री थे, जिनकी काम करने की शैली पूरी तरह अलग थी. वाजपेयी साथ काम करने वालों की कद्र करना जानते थे.जबकि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने मंत्रियों को काम करने की छूट दी थी. मुखर्जी ने देश के पहले प्रधानमंत्री नेहरू का अपने जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव का भी जिक्र करते हुए कहा कि पंडित नेहरू ने संसद को जीवंत बनाया. जबकि राष्ट्रपति ने सरदार पटेल को देश को जोड़ने का काम करने वाला बताया. मुखर्जी ने पूर्व प्रधानमंत्री 'इंदिरा गांधी को एक बहुत मजबूत नेता और सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्री बताया.

गौरतलब है कि देश के 13वें राष्ट्रपति बने प्रणब मुखर्जी ने कहा कि वह संसद में दो साल और काम करना चाहते थे. लेकिन संवैधानिक दायित्व ने ऐसा नहीं होने दिया. एक समाचार चैनल के कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने कहा कि कई जिम्मेदारियां थीं जिन्हें वे पूरा करना चाहते थे. स्मरण रहे कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल जुलाई में समाप्त हो रहा है.

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