आज का युवा 'की-बोर्ड' ठोक रहा है.....

आज का युवा 'की-बोर्ड' ठोक रहा है.....

युवा!!!! आप तो जानते ही होंगे की 'युवा' क्या होता है, अगर किसी नेताजी की भाषा में कहा जाये तो' युवा' देश की सबसे बड़ी ताकत होती है. और नेता, 'युवा' को देश की ताकत इसलिए बताते हैं क्योंकि उन्हें उनसे वोट चाहिए होता है। इन्हीं, नेताओ को आप कहोगे कि यदि युवा देश की शक्ति है तो आप इन्हें चुनाव में खड़ा क्यों नही होने देते हो ? इस बात पर नेता जी का सीधा सा जवाब होगा, ''हमें देश की सेवा करने का मौका मिला है, अभी तो हमें ही करने दीजिये.....!''

बहरहाल, आज के समय में यह माना जाता है कि युवा जो चाहे कर सकता है। युवा सत्ता, सरकार और वर्तमान बदल सकता है, किन्तु आखिर ऐसा हो क्यों नही रहा है ? इस पर गहन अध्ययन करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला की देश बदलने वाला युवा तो की-बोर्ड ठोंक रहा है। शायद आपको यह बात थोड़ी अजीब लगेगी, किन्तु युवा को आज के समय में की-बोर्ड ठोंकने से ही फुर्सत नहीं हैं। जैसे, घोड़ा टक-टक -टक... चलता रहता है, वैसे ही युवा भी दिन भर की-बोर्ड पर ही टक-टक-टक... में लगा रहता है।

चाहे वो स्मार्टफोन का की-बोर्ड हो या कंप्यूटर का की-बोर्ड, वह बस दिनभर उसी पर ही लगा रहता है, जिसके कारण उसका ध्यान देश की तरफ जाता ही नहीं है। हां, यह बात सही है कि टेक्नोलॉजी का जमाना है, तकनीकी के साथ चलना पड़ता है, किन्तु ऐसी भी क्या तकनीकी, जिससे देश की 'युवा' तकनीकी ही खराब हो जाये। 

अरे भाई! कितनी बार अपने चश्मे का नम्बर चेंज करवाओगे। यह चश्मे का नम्बर भी चेंज इसलिए हो रहा है कि वो देश की तरफ ध्यान ही नही दे रहा है। अगर थोड़ा टाइम की-बोर्ड ठोंकने से मिले तो वो देश की बात करेगा ना। पर बस पैसा,पैसा, पैसा...! कुछ लोग तो ऐसे भी है जो पैसे के लिए दो-दो जगह की-बोर्ड ठोंकते हैं। हां, भैया मेरा मतलब है कि दो-दो जगह काम करते हैं।

इसके अलावा एक प्रजाति और पायी जाती है की-बोर्ड ठोंकने वालो की। जिन्हें कोई काम तो नही होता है किन्तु वे बराबर की-बोर्ड को ठोंकते है। वे बस सोशल साइट्स और इधर-उधर पूरी दुनिया का चक्कर लगाते रहते है। हालांकि इसे वे समाजसेवा का नाम देते है, किन्तु की-बोर्ड बराबर ठोंकते है। 

इस लेख का आशय यह नहीं है कि आप की-बोर्ड ठोकना बंद कर दें, किन्तु मेरे भाई आप युवा हो थोड़ा देश के बारे में भी सोचो और क्या ???

अरे भाई कोई समझाओ इन लोगो को.....

क्या 60 साल में कभी बजे थे ऐसे रात के आठ.....

जी हां। सब कुछ बिकता है यहाँ

 

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